उत्तराखंड में अब मोबाइल पर मिलेगा नशा मुक्ति केंद्र का पूरा अपडेट, जानिए मरीज के इलाज में क्या होगा खास

उत्तराखंड में सरकारी और निजी नशा मुक्ति केंद्रों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है. अधिकृत परिजन मोबाइल पर मरीज की भर्ती, इलाज की प्रगति, चिकित्सकीय परामर्श, फालोअप और डिस्चार्ज से जुड़ी जानकारी देख सकेंगे. राज्य में 200 से अधिक बेड वाली सरकारी एटीयू शुरू करने की भी योजना है.

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Babli Rautela

उत्तराखंड में नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी डिजिटल सुविधा शुरू करने की तैयारी चल रही है. अब मरीज के इलाज की स्थिति जानने के लिए परिजनों को बार बार नशा मुक्ति केंद्र के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. राज्य में सरकारी और निजी नशा मुक्ति केंद्रों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए अधिकृत परिजन मोबाइल पर मरीज के उपचार से जुड़ी जरूरी जानकारी देख सकेंगे. इससे परिवारों को इलाज की स्थिति जानने में आसानी होगी और नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली में भी ज्यादा जवाबदेही आने की उम्मीद है.

कर्नाटक के ई मानस की तर्ज पर बनेगा प्लेटफॉर्म

स्वास्थ्य विभाग की बैठक में इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. प्रस्तावित प्लेटफॉर्म को कर्नाटक के ई मानस मॉडल की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है. इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बनाने की योजना है. ई मानस मॉडल में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का डिजिटल रजिस्टर, मरीजों के उपचार से जुड़े रिकॉर्ड और संस्थानों की निगरानी जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसी तरह उत्तराखंड के प्रस्तावित प्लेटफॉर्म पर राज्य के नशा मुक्ति केंद्रों की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने की योजना है. इसमें नशा मुक्ति केंद्र का पंजीकरण, उपलब्ध बेड, विशेषज्ञ चिकित्सकों और वहां मिलने वाली उपचार सुविधाओं की जानकारी शामिल की जाएगी. इससे जरूरतमंद परिवारों को अपने आसपास उपलब्ध उपचार केंद्रों के बारे में जानकारी हासिल करने में आसानी हो सकती है.

मोबाइल पर दिखेगी इलाज की स्थिति

प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था की सबसे खास सुविधा मरीज के उपचार से जुड़ी जानकारी होगी. मरीज के अधिकृत परिजन मोबाइल के जरिए उसकी भर्ती की स्थिति और इलाज की प्रगति देख सकेंगे. इसके अलावा चिकित्सकीय परामर्श, निर्धारित फालोअप और डिस्चार्ज से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना है. इससे परिवार के सदस्यों को मरीज के उपचार की स्थिति जानने के लिए बार बार केंद्र पर जाने की जरूरत कम हो सकती है.


हालांकि, मरीज की मेडिकल जानकारी को सुरक्षित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. संवेदनशील स्वास्थ्य संबंधी जानकारी केवल अधिकृत व्यक्ति को ही उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है. इससे मरीज की गोपनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी भी होगी आसान

डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य केवल मरीजों के परिवारों को जानकारी देना नहीं है. इसके जरिए राज्य में संचालित सरकारी और निजी नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी को भी बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी. एक ही डिजिटल व्यवस्था में केंद्रों की जानकारी उपलब्ध होने से प्रशासन को उनकी स्थिति और सुविधाओं पर नजर रखने में आसानी हो सकती है. उपलब्ध बेड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जानकारी मिलने से मरीजों के लिए उपयुक्त केंद्र चुनने में भी मदद मिल सकती है.

उत्तराखंड में सरकारी एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट यानी एटीयू की स्थापना की भी तैयारी चल रही है. पहले चरण में उन अस्पतालों में 10 बेड की यूनिट बनाई जाएगी, जहां मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं. राज्य में कुल 200 से अधिक बेड की क्षमता वाली एटीयू स्थापित करने की योजना है. इसकी शुरुआत सेलाकुई स्थित मेंटल अस्पताल से होगी. यहां सबसे पहले 10 बेड की एडिक्शन ट्रीटमेंट यूनिट स्थापित की जाएगी. इसके बाद कोरोनेशन अस्पताल देहरादून, हरिद्वार जिला अस्पताल, टिहरी जिला अस्पताल, ऊधमसिंह नगर जिला अस्पताल और नैनीताल जिला अस्पताल में भी एटीयू शुरू करने की योजना है.