यूआइआइडीबी की जमीन पर कांग्रेस को घेरा, महेंद्र भट्ट बोले- पहले अपने शासनकाल का हिसाब दें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने यूआइआइडीबी को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि फिलहाल 18 हेक्टेयर जमीन की बात है और सरकार इसे बेचने के बजाय निवेश के लिए लीज पर देगी.

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Ashutosh Rai

Mahendra Bhatt : उत्तराखंड में सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं. कांग्रेस ने यूआइआइडीबी के जरिए सरकार पर जमीन के मुद्दे को लेकर सवाल उठाए हैं. जवाब में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस से उसके शासनकाल में हुए भूमि आवंटनों का हिसाब जनता के सामने रखने को कहा.

यूआइआइडीबी की जमीन पर भाजपा का जवाब

महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार के विकास और निवेश मॉडल के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कांग्रेस के सात हजार बीघा जमीन के दावे के जवाब में कहा कि यूआइआइडीबी के पास फिलहाल 18 हेक्टेयर भूमि है. भट्ट के मुताबिक इसका मालिकाना हक राज्य सरकार के पास ही रहेगा. निवेश के लिए जमीन को नियमों के तहत लीज पर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि बोर्ड का मकसद सरकारी जमीन बेचना नहीं, बल्कि ऐसी जमीन का आर्थिक इस्तेमाल करना है, जिससे निवेश, रोजगार और सरकार की कमाई बढ़ सके.

कांग्रेस के पुराने भूमि आवंटनों पर सवाल

भट्ट ने कांग्रेस के शासनकाल में हुए कुछ भूमि आवंटनों का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने देहरादून आईटी पार्क, सिटी पार्क और सिडकुल से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस से जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि अगर आज कांग्रेस सरकारी जमीन के इस्तेमाल पर सवाल उठा रही है तो उसे अपने कार्यकाल के फैसलों की भी जानकारी देनी चाहिए. भट्ट ने 2006 में सिडकुल के जरिए सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को जमीन देने और 2013 में देहरादून आईटी पार्क में जीटीएम बिल्डर को भूमि आवंटन का मामला उठाया. उन्होंने आईटी उद्योग के लिए तय जमीन के दूसरे कामों में इस्तेमाल के आरोपों पर भी सवाल किया.


कांग्रेस से मांगा पुराने फैसलों का हिसाब

भाजपा ने कांग्रेस के आरोप पत्र समिति के अध्यक्ष करन माहरा के दस्तावेज में आईटी पार्क में सिक्का कंपनी को जमीन दिए जाने के उल्लेख का भी हवाला दिया. भट्ट ने सवाल किया कि कांग्रेस को अगर सरकारी भूमि के इस्तेमाल पर आपत्ति है तो वह पहले अपने शासनकाल में हुए ऐसे फैसलों की स्थिति साफ करे. उन्होंने पूछा कि जमीन किन नियमों और शर्तों पर दी गई थी और उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ. भाजपा का कहना है कि कांग्रेस मौजूदा सरकार की निवेश नीति पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने भूमि आवंटनों का जवाब जनता को दे.