देवभूमि में गूंजे जयकारे, खटीमा में सीएम धामी ने किया भगवान शिव और बजरंगबली की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण

खटीमा के बंडिया क्षेत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान शिव और बजरंगबली की प्रतिमाओं का अनावरण किया.

X
Ashutosh Rai

उत्तराखंड के खटीमा स्थित बंडिया गांव में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का विशेष आयोजन देखने को मिला. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यहां देवाधिदेव महादेव और प्रभु श्रीराम के परम भक्त बजरंगबली की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की.

धार्मिक माहौल में हुआ प्रतिमाओं का अनावरण

बंडिया में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव और बजरंगबली की प्रतिमाओं का अनावरण किया. इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न हुए. मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं और धार्मिक स्थलों से है. यहां की आस्था लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम करती है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.


प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

प्रतिमाओं के अनावरण के बाद मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और बजरंगबली के चरणों में प्रदेशवासियों की खुशहाली, उन्नति और शांति की कामना की. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों का जीवन धर्म और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है. ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में भाईचारे और एकता को मजबूत बनाते हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार हर क्षेत्र के विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है. उनका मानना है कि विकास और संस्कृति दोनों साथ-साथ चलें, तभी समाज मजबूत बनता है.

धरोहरों के संरक्षण पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के मंदिर, तीर्थस्थल और धार्मिक केंद्र केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि हमारी पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. इन स्थलों से राज्य की संस्कृति, इतिहास और परंपराएं जुड़ी हुई हैं. उन्होंने बताया कि सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ना और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाना है.