अंकिता भंडारी मर्डर: दो बहनों ने अपने खून से राष्ट्रपति को लिखा पत्र, की न्याय की मांग
खून से लिखे गए इस पत्र में संजना ने लिखा है कि भारत एक न्यायप्रिय देश है, जहां कानून से कोई भी बड़ा नहीं होना चाहिए
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देशभर में गुस्से का माहौल बना हुआ है. इसी बीच उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक बेहद भावुक और चौंकाने वाली पहल सामने आई है. भिकियासैंण क्षेत्र की दो बहनों ने न्याय की मांग को और मजबूत करते हुए राष्ट्रपति को अपने खून से पत्र लिखा है. यह पत्र अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के दिलों को झकझोर रहा है.
कौन हैं ये दोनों बहनें
यह पत्र कुसुम बौड़ाई और उनकी छोटी बहन संजना बौड़ाई ने लिखा है. संजना कक्षा 10 की छात्रा हैं. दोनों बहनें अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण ब्लॉक के बरकिंडा गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने राष्ट्रपति से अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और इस हत्याकांड में शामिल सभी दोषियों, खासकर प्रभावशाली लोगों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है.
पत्र में क्या लिखा गया
खून से लिखे गए इस पत्र में संजना ने लिखा है कि भारत एक न्यायप्रिय देश है, जहां कानून से कोई भी बड़ा नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी जैसी बेटियों के साथ हुई घटनाएं पूरे समाज को हिला देती हैं. अगर ऐसे मामलों में ताकतवर लोगों को बचाया गया, तो आम लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा टूट जाएगा.
सख्त कार्रवाई की अपील
पत्र में राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वे इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराएं. बहनों का कहना है कि ऐसा कदम जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी बेटी खुद को असुरक्षित महसूस न करे. उन्होंने लिखा कि देश की बेटियों की सुरक्षा सरकार और समाज दोनों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
आम छात्रा की बड़ी आवाज
संजना ने पत्र में खुद को एक सामान्य छात्रा बताया, लेकिन साथ ही कहा कि एक नागरिक होने के नाते अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना उसका कर्तव्य है. कुसुम बौड़ाई ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना सिर्फ एक लड़की को न्याय देना नहीं, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देना है कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून सबके लिए बराबर है.
सोशल मीडिया पर गूंज
पत्र सामने आने के बाद यह पहल इंटरनेट मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है. लोग दोनों बहनों के साहस, संवेदनशीलता और हिम्मत की सराहना कर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि यह पत्र देश की न्याय व्यवस्था के लिए एक मजबूत सवाल बनकर खड़ा हुआ है.