इलाहाबाद हाई कोर्ट को क्यों रद्द करनी पड़ी 69,000 सहायक शिक्षकों की मेरिट लिस्ट, क्या हैं आरोप, पढ़ें पूरी डिटेल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को साल 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (ATRE) के माध्यम से हुई 69,000 सहायक शिक्षकों की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार को चयनित अध्यापकों की संशोधित मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था.

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UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को साल 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (ATRE) के माध्यम से हुई 69,000 सहायक शिक्षकों की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार को चयनित अध्यापकों की संशोधित मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था.

दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं जिनमें अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के कानून के अनुपात के हिसाब से चयनित नहीं किया गया जिसके बाद कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं का पता लगाने को कहा है. दरअसल, 5 दिसंबर 2018 को यूपी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में 69,000 सहायक शिक्षकों के पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था.

4.31 लाख लोगों ने किया था आवेदन

इस भर्ती के लिए 4.31 लाख लोगों ने आवेदन किया था जिसमें से 4.10 लोगों ने परीक्षा दी थी. परीक्षा का परिणाम 12 मई 2020 को घोषित हुआ जिसमें 1.46 लाख लोगों ने परीक्षआ पास की. सामान्य और अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 67.11%, ओबीसी के लिए 66.73% और एससी उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 61.01% रखी गई थी. कुल 69,000 पदों में से 67,867 पदों पर भर्ती हुई और बाकी 1,133 पदों को यह बताते हुए खाली छोड़ दिया गया कि इस वर्ग से कोई उम्मीदवार नहीं है.

क्या हैं आरोप
अब आरोप ये इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की सूची को उनके श्रेणी-वार (Category-Wise) अंकों की घोषणा किए बिना प्रकाशित किया गया था.

यह भी आरोप है कि अनारक्षित श्रेणी के चयनित उम्मीदवार कुछ चयनित उम्मीदवारों के 50% से भी अधिक थे और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया. भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाले उम्मीदवारों के मुताबिक, ओबीसी उम्मीदवारों को मात्र 3.86% आरक्षण दिया गया जबकि उनको 27% आरक्षण दिया जाना था जबकि एससी वर्ग के उम्मीदवारों को 21% के बजाय 16.2% प्रतिनिधित्व दिया गया.