हाथरस भगदड़ के आरोपी बाबा पर क्यों चुप्पी साधे हैं नेता? अब आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दिया जवाब
Acharya Pramod Krishnam Interview: हाल ही में हाथरस की घटना पर सियासत तो जोरों पर हो रही है, अलग अलग बयानबाजी भी हो रही है लेकिन ऐसे वक्त में हमने देखा है कि एक तरफ राहुल गांधी जाते हैं जब हाथरस में प्रभावितों से मुलाकात करते हैं. वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव की सोशल मीडिया प्रोफाइल से बकायदा एक पोस्ट किया जाता है.
Acharya Pramod Krishnam Interview: हाल ही में हाथरस की घटना पर सियासत तो जोरों पर हो रही है, अलग अलग बयानबाजी भी हो रही है लेकिन ऐसे वक्त में हमने देखा है कि एक तरफ राहुल गांधी जाते हैं जब हाथरस में प्रभावितों से मुलाकात करते हैं. वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव की सोशल मीडिया प्रोफाइल से बकायदा एक पोस्ट किया जाता है.
इस बीच अखिलेश यादव की पुरानी पोस्ट वायरल होती है जो कि 2023 की होती है? और उस पोस्ट में बकायदा वो इसी सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के मंच पर नजर आते हैं लेकिन आप जब ये पूरा एक हादसा हुआ तो इस दौरान तमाम नेताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े करते हैं दूसरी बात अखाड़ा परिषद में आखिर जिस तरह से निर्णय लिया जाना है वो आखिर कितना प्रभावशाली होता है ये समझना बहुत जरूरी है.
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इसी को समझने के लिए इंडिया डेली ने आचार्य प्रमोद कृष्णम से बात की जो कि एक धर्मगुरु होने के साथ ही राजनीति गलियारों में भी सक्रिय रहते हैं. इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में कई तरह के रिएक्शन्स को जन्म दिया है, जिससे जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी के बारे में सवाल उठ खड़े हुए हैं. स्प्रिचुअल लीडर्स की भागीदारी और उनके कार्यों के नैतिक प्रभावों को संबोधित करने की आवश्यकता ने भारत में आस्था, विश्वास और सामाजिक मूल्यों के बारे में महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस इंटरव्यू में हम लोगों की तरफ से खुद को भगवान, जिन्न या भूत होने का दावा करने की धारणा पर चर्चा करते हैं, ऐसे दावों के साथ आने वाली जिम्मेदारी पर बल देता है. यह अंधविश्वास और समाज पर इसके प्रभाव पर सवाल उठाता है, किसी भी धार्मिक या स्प्रिचुअल उपाधि से पहले नैतिक जिम्मेदारी और मनुष्य होने के सार की आवश्यकता को रेखांकित करता है.