कनाडा के लिए खतरा बने खालिस्तानी समर्थक? CSIS के रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
कनाडा में रह रहे खालिस्तानी समर्थक अब वहां की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं. इस बात का खुलासा कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने अपने रिपोर्ट में किया है.
कनाडा की प्रमुख खुफिया एजेंसी ने खालिस्तानी समर्थकों को साफ तौर से अपने देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने एक सार्वजनिक रिपोर्ट में इस समूह की हिंसक गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है. इस रिपोर्ट को शुक्रवार को कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई.
रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी कनाडा और उसके हितों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. ये तत्व कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल अपने हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाने और चंदा इकट्ठा करने के लिए करते हैं. इकट्ठा किए गए पैसे का उपयोग बाद में हिंसक गतिविधियों में होता है.
कनाडा की सुरक्षा एजेंसी ने दी चेतावनी
एजेंसी की ओर से चेतावनी दी गई है कि कुछ चरमपंथी कनाडाई नागरिकों के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर खतरा पैदा कर रहे हैं. यह रिपोर्ट एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुए बम विस्फोट की 40वीं वर्षगांठ के एक साल बाद आई है. आपको याद दिला दें कि 1985 का यह हमला कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला था, इस घटना में 329 निर्दोष लोग मारे गए थे. जिसमें से अधिकतर कनाडाई नागरिक थे. CSIS रिपोर्ट में संदेह जताया गया है कि इस हमले में CBKE समूहों के सदस्यों की संलिप्तता थी.
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कनाडा में कई नागरिक वैध और लोकतांत्रिक तरीके से अलगाववादी आंदोलन का समर्थन करते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हैं. ये तत्व मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, फंडिंग जुटाने और ऐसी योजनाओं को अंजाम देने के लिए कनाडा को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं. खालिस्तानी चरमपंथी भारत से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र की मांग करते हैं. भारत सरकार की ओर से बहुत पहले ही इन समूहों को लंबे समय से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया है.
भारत-कनाडा के संबंध
भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंध 2023 में काफी तनावपूर्ण हो गए थे, जब उस वक्त के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ब्रिटिश कोलंबिया में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को दोष भारत पर दिया था. हालांकि भारत ने हमेशा से इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. वहीं पिछले साल सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने के प्रयास तेज कर दिए हैं.