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Jaunpur Atala Masjid Controversy: अटाला मंदिर तोड़कर बनाई गई मस्जिद! हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, कोर्ट ने मानी ये बात

अटाला मस्जिद का सर्वे इस समय एक महत्वपूर्ण कानूनी और ऐतिहासिक कदम है, जो इस विवाद का समाधान खोजने में मदद कर सकता है. हालांकि, इस मामले पर भविष्य में और अधिक बहस और कानूनी कार्यवाही की संभावना बनी हुई है.

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Edited By: Mayank Tiwari
Jaunpur Atala Masjid Controversy: अटाला मंदिर तोड़कर बनाई गई मस्जिद! हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, कोर्ट ने मानी ये बात
Courtesy: X@SachinGuptaUP

UP News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित अटाला मस्जिद के सर्वे का आदेश स्थानीय कोर्ट ने दिया है. इस फैसले के बाद से अटाला मस्जिद को लेकर विवाद और भी तूल पकड़ सकता है. हिंदू पक्ष ने इस मस्जिद को लेकर एक नया दावा किया है, जिसके अनुसार यह मस्जिद नहीं, बल्कि अटाला देवी मंदिर है. इस मामले में कोर्ट ने सर्वे करने का आदेश दिया है ताकि स्थिति का स्पष्टता से मूल्यांकन किया जा सके. बता दें कि, हिन्दू पक्ष फोर्स के साथ मस्जिद के सर्वे की मांग कर रहा था. जबकि, मुस्लिम पक्ष इसका विरोध कर रहा है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू पक्ष के लोगों का कहना है कि अटाला मस्जिद वास्तव में एक प्राचीन मंदिर है, जिसे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने तोड़ा और उस पर मस्जिद का निर्माण कर दिया. उनका यह भी दावा है कि इस जगह पर पहले देवी की पूजा होती थी और इसे अटाला देवी मंदिर के रूप में जाना जाता था. इस मुद्दे को लेकर हिंदू पक्ष द्वारा कई बार अदालत में याचिका दायर की गई थी, और अब कोर्ट ने इस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए सर्वे का आदेश दिया है. जौनपुर सिविल कोर्ट ने सर्वे के आदेश दिए हैं. इसे लेकर 16 दिसंबर को सुनवाई होगी.

मस्जिद का इतिहास और विवाद

अटाला मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है और यह जौनपुर जिले का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. यह मस्जिद 14वीं शताबदी में निर्माण की गई थी . इसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण फिरोज तुगलक के शासनकाल में मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण किया गया. हालांकि, हिंदू पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद पहले एक मंदिर थी और इसे मुस्लिम आक्रमणों के दौरान तोड़ा गया था. हिंदू पक्ष का कहना है कि यह संपत्ति मूल रूप से 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र द्वारा निर्मित 'अटाला देवी मंदिर' थी.  

मुस्लिम समाज ने क्या दी प्रतिक्रिया?

मस्जिद कमेटी का कहना है कि हिंदू पक्ष का मुकदमा कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है. उनका दावा है कि एसवीए सोसायटी के नियम उन्हें इस प्रकार के मामले में शामिल होने की अनुमति नहीं देते. इसके साथ ही, संपत्ति हमेशा से मस्जिद के रूप में इस्तेमाल में रही है और 1398 में इसके निर्माण के बाद से मुस्लिम समुदाय वहां नियमित रूप से नमाज अदा करता आ रहा है.

जानें सर्वे का उद्देश्य और क्या है प्रक्रिया!

वहीं, स्थानीय कोर्ट ने यह आदेश दिया है कि अटाला मस्जिद का सर्वे किया जाए, ताकि यह पता चल सके कि इस स्थल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व क्या है, सर्वे में यह देखा जाएगा कि इस स्थान पर पहले कौन-सा धार्मिक स्थल था और अगर कोई मंदिर था, तो उसे मस्जिद में कैसे परिवर्तित किया गया, यह सर्वे इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.