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पंचायत ने तय कर दिया पति का 'वीकली टाइम-टेबल', 3 दिन पहली और 3 दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा शख्स; रविवार को रहेगी छुट्टी

रामपुर के एक गांव में दो पत्नियों के झगड़े को सुलझाने के लिए पंचायत ने अनोखा फैसला लिया. पति तीन-तीन दिन दोनों पत्नियों के साथ रहेगा और रविवार को उसे साप्ताहिक अवकाश मिलेगा.

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Kuldeep Sharma

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आया एक मामला इन दिनों खूब चर्चा में है. यहां घरेलू विवाद सुलझाने के लिए पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने सभी को चौंका दिया. दो पत्नियों के बीच रोज-रोज के झगड़ों से परेशान एक परिवार का मसला जब पुलिस तक पहुंचा, तो गांव के बुजुर्गों ने बीच का रास्ता निकाला. इस फैसले ने न सिर्फ विवाद रोका, बल्कि सामाजिक स्तर पर बहस भी छेड़ दी.

क्या है पूरा मामला

यह मामला अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया आकिल गांव का है. गांव के एक युवक ने दो शादियां की थीं. पहली शादी परिवार की सहमति से हुई थी, जबकि दूसरी शादी उसने अपनी पसंद से की. समय के साथ दोनों पत्नियों के बीच तनाव बढ़ता गया. दोनों ही पति पर पूरा अधिकार जताने लगीं, जिससे घर का माहौल लगातार बिगड़ता चला गया.

पुलिस तक पहुंचा घरेलू विवाद

घरेलू कलह ने जब गंभीर रूप ले लिया, तो मामला थाने तक जा पहुंचा. पुलिस के सामने भी दोनों पत्नियों की शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही थीं. स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने गांव के जिम्मेदार लोगों से हस्तक्षेप करने को कहा. इसके बाद पंचायत बुलाने का फैसला किया गया, ताकि बिना कानूनी कार्रवाई के समाधान निकाला जा सके.

पंचायत का अनोखा फॉर्मूला

पंचायत में लंबी चर्चा के बाद एक लिखित समझौता तैयार किया गया. तय हुआ कि पति सोमवार से बुधवार तक पहली पत्नी के साथ रहेगा. गुरुवार से शनिवार तक वह दूसरी पत्नी के घर रहेगा. रविवार को पति को 'साप्ताहिक अवकाश' मिलेगा, जिसमें वह दोनों से अलग अपनी मर्जी से समय बिताएगा. इस फॉर्मूले को '3-3-1' नाम दिया गया.

लिखित समझौता और शर्तें क्या हैं

भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो, इसके लिए पंचायत ने समझौते को लिखित रूप दिया. पति और दोनों पत्नियों से दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए. यह भी तय हुआ कि किसी विशेष परिस्थिति में आपसी सहमति से दिनों में बदलाव किया जा सकता है. पंचायत ने चेतावनी दी कि समझौते के उल्लंघन पर दोबारा कार्रवाई की जाएगी.

इलाके में चर्चा और पुराना उदाहरण

यह फैसला गांव ही नहीं, पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है. लोग इसे घरेलू जीवन को संतुलित करने का देसी तरीका बता रहे हैं. इससे पहले बिहार के पूर्णिया जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां पंचायत और परामर्श केंद्र ने इसी तरह का बंटवारा तय किया था. अब सबकी नजर इस बात पर है कि रामपुर का यह समझौता कितना टिकाऊ साबित होता है.