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राम मंदिर में कल से लागू होगा नया ड्रेस कोड, अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्र पहनेंगे पुजारी

राम मंदिर की नई पूजा व्यवस्था जानें, जहां सभी पुजारी अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्र में नजर आएंगे. ट्रस्ट ने शुचिता और वैष्णव परंपरा के अनुसार नया ड्रेस कोड लागू किया.

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Edited By: Reepu Kumari
राम मंदिर में कल से लागू होगा नया ड्रेस कोड, अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्र पहनेंगे पुजारी
Courtesy: Pinterest

अयोध्या: राम मंदिर की नई पूजा व्यवस्था अयोध्या में लागू होने जा रही है, जिसके तहत सभी पुजारी अब एक समान वेशभूषा में सेवा करेंगे. राम मंदिर की नई पूजा व्यवस्था और नया ड्रेस कोड शुचिता तथा वैष्णव परंपरा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. अब गर्भगृह में सेवा देने वाले सभी अर्चक पीत रंग के बिना सिलाई वाले रेशमी वस्त्र धारण करेंगे, जिससे पूजा पद्धति में एकरूपता भी दिखाई देगी.

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हाल के दिनों में व्यवस्था सुधार के कई फैसले लिए गए हैं. दान गणना प्रक्रिया में बदलाव के बाद अब ट्रस्ट ने अर्चकों की वेशभूषा को भी एक समान बनाने का निर्णय लिया है. मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे धार्मिक मर्यादा, शुचिता और वैष्णव परंपरा का पालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा.

कैसा होगा पुजारियों का नया ड्रेस कोड?

नए नियम के अनुसार सभी अर्चक गर्मी के मौसम में नीचे पीत रंग की धोती और ऊपर बिना सिलाई वाला रेशमी अंगवस्त्र धारण करेंगे. यह अंगवस्त्र कंधे पर रखा जाएगा और पूरी तरह बिना सिला होगा. धार्मिक समिति के अनुसार गर्भगृह में सेवा देने वाले पुजारियों के लिए रेशमी वस्त्र सबसे उपयुक्त माने जाते हैं. इसी कारण सभी अर्चकों के लिए एक समान पीत वेशभूषा तय की गई है.

मौसम बदलने पर बदलेंगे वस्त्र

मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि ड्रेस का रंग हर मौसम में पीत ही रहेगा, लेकिन वस्त्र की प्रकृति मौसम के अनुसार बदलेगी.

  • गर्मी में बिना सिलाई वाले रेशमी वस्त्र.
  • शरद ऋतु में हल्के पारंपरिक वस्त्र.
  • सर्दियों में पीत रंग के ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे.
  • सभी अर्चकों के लिए एक समान वेशभूषा अनिवार्य रहेगी.

अमावस्या और पूर्णिमा से बदलता है रोस्टर

रामलला के पुजारियों की ड्यूटी हर माह अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलती है. जिस समूह की सुबह की पाली रहती है, वह प्रतिपदा से सायंकाल की सेवा में आ जाता है, जबकि शाम वाले पुजारी सुबह की आरती की जिम्मेदारी संभालते हैं. इसी रोस्टर परिवर्तन के साथ नया ड्रेस कोड भी लागू किया जाएगा, ताकि सभी अर्चक नई व्यवस्था के अनुसार अपनी सेवाएं शुरू कर सकें.

सिले हुए वस्त्र क्यों नहीं पहनेंगे पुजारी?

धार्मिक न्यास समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास के अनुसार वैष्णव परंपरा में गर्भगृह की मर्यादा सर्वोपरि होती है. उन्होंने बताया कि बिना सिलाई वाले रेशमी वस्त्र शुचिता का प्रतीक माने जाते हैं, जबकि सिले हुए वस्त्र गर्भगृह की पूजा परंपरा के अनुरूप नहीं माने जाते. यही कारण है कि राम मंदिर की पूजा व्यवस्था में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है.