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नोएडा के नामी स्कूल में भयंकर लापरवाही, 7 घंटे तक बस के अंदर 'कैद' रहा मासूम; बेहोशी की हालत में मिला छात्र

नोएडा के एक प्रतिष्ठित स्कूल की बस में UKG का छात्र स्टाफ की लापरवाही के कारण 7 घंटे तक बंद रहा. बच्चा स्कूल के बजाय 25 किमी दूर यार्ड पहुंच गया, जहाँ वह भीषण गर्मी और भूख-प्यास से तड़पता रहा. इस घटना ने स्कूल सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मासूम की चीखें और सिस्टम की खामोशी नोएडा के एक बेहद प्रतिष्ठित स्कूल में सुरक्षा दावों की उस समय धज्जियां उड़ गईं, जब यूकेजी (UKG) कक्षा का एक मासूम बच्चा स्कूल बस के अंदर ही छूट गया. जानकारी के मुताबिक, बच्चा सुबह बस में सो गया था. लापरवाह बस स्टाफ ने स्कूल पहुंचने पर सभी बच्चों को उतारा, लेकिन बस की जांच करना जरूरी नहीं समझा. इसके बाद बस को स्कूल से करीब 25 किलोमीटर दूर एक यार्ड में ले जाकर खड़ा कर दिया गया. अगले 7 घंटों तक वह मासूम भीषण गर्मी, भूख और प्यास से जूझते हुए बस के भीतर बंद रहा और रो-रोकर मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था.

अटेंडेंस का खेल: बस में 'प्रेजेंट', क्लास में 'एब्सेंट' 

इस पूरी घटना में स्कूल प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही तब सामने आई जब दोपहर में बस घर वापस पहुंची और बच्चा नहीं मिला. घबराए परिजनों ने जब स्कूल से संपर्क किया, तो पता चला कि बच्चा स्कूल पहुंचा ही नहीं था. हैरानी की बात यह है कि क्लास की अटेंडेंस में उसे अनुपस्थित दिखाया गया था, जबकि बस अटेंडेंस में वह उपस्थित दर्ज था. स्कूल ने न तो माता-पिता को कोई मैसेज भेजा और न ही इस विसंगति की जांच की. मां ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए लिखा कि आमतौर पर स्कूल से मैसेज आता है, लेकिन उस दिन सिस्टम पूरी तरह मौन रहा.

यार्ड में मिला बदहवास 

मासूम परिजनों की घंटों की भागदौड़ और तलाश के बाद बच्चा स्कूल से 25 किलोमीटर दूर बस यार्ड में पाया गया. जब उसे बस से बाहर निकाला गया, तो वह पसीने से लथपथ और बुरी तरह घबराया हुआ था. मां के शब्दों में- '7 घंटे तक लावारिस हालत में रहने के बाद जब वह हमें मिला, तो उसकी हालत देखकर कलेजा मुंह को आ गया.'

अभिभावकों की सुरक्षा के लिए 'चेकलिस्ट' इस दर्दनाक यातना से गुजरने के बाद पीड़ित मां ने अन्य अभिभावकों को सचेत करते हुए चार महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

1. माता-पिता खुद सुनिश्चित करें कि बच्चा सुरक्षित बस में चढ़े और उतरे.

2. अगर बच्चा स्कूल नहीं पहुंचता, तो स्कूल द्वारा तुरंत माता-पिता को सूचित करने का नियम हो.

3. बस खाली होने के बाद हर बार उसकी 'फिजिकल चेकिंग' अनिवार्य की जाए.

4. बस और क्लास की अटेंडेंस का रियल-टाइम मिलान हो ताकि ऐसी चूक दोबारा न हो.

 स्थानीय अभिभावक संगठनों ने जिला प्रशासन और पुलिस से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है         ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान जोखिम में न डाली जाए.