मुजफ्फरनगर के जानसठ कस्बे में शनिवार सुबह एक पुरानी इमारत अचानक ढह गई. इमारत में दरारें दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी थी. पुलिस ने आसपास मौजूद दुकानों को बंद कराया और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा. सूचना मिलने पर एसडीएम रश्मि लांबा, नगर पंचायत चेयरमैन डॉ आबिद हुसैन और कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे. अधिकारी इमारत को सुरक्षित तरीके से हटाने की योजना पर चर्चा कर रहे थे, तभी वह भरभराकर नीचे आ गई.
जानसठ के मोहल्ला बुध बाजार में यह पुरानी इमारत लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ी थी. शनिवार सुबह लोगों की नजर इसकी दीवारों पर पड़ी नई दरारों पर गई. आसपास घर और दुकानें होने के कारण लोगों में तुरंत चिंता फैल गई. मोहल्लेवासियों ने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी. पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर आसपास की दुकानों को बंद कराया और लोगों को इमारत से दूर रहने की हिदायत दी.
इमारत की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम रश्मि लांबा मौके पर पहुंचीं. नगर पंचायत चेयरमैन डॉ आबिद हुसैन और अन्य कर्मचारी भी वहां पहुंचे. अधिकारियों का ध्यान आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित रखने और इमारत को नियंत्रित तरीके से हटाने पर था. प्रशासनिक स्तर पर जरूरी कदमों पर विचार चल ही रहा था कि इमारत में मौजूद दरारें तेजी से बढ़ने लगीं. कुछ ही पलों में स्थिति पूरी तरह बदल गई.
अचानक पुरानी इमारत का ढांचा हिलने लगा और देखते ही देखते वह तेज आवाज के साथ जमीन पर आ गिरा. घटना के समय आसपास मौजूद लोग पहले ही सतर्क हो चुके थे, इसलिए किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली. इमारत गिरने का मंजर देखकर वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी जरूर मची, लेकिन समय रहते बरती गई सावधानी ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया. स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली.
कस्बे के समीर हसन के अनुसार, इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण सैयद उमर अली खान ने कराया था. बताया जाता है कि यह ढांचा करीब 1208 के आसपास तैयार हुआ था और इसके चारों ओर कभी महल हुआ करता था. समीर हसन ने बताया कि सैयद उमर अली खान बादशाह कुतुबुद्दीन ऐबक के दरबार में वजीर थे. उस दौर में गंगा और यमुना के बीच के इलाके को सूबा-ए-दोआब कहा जाता था और अली खान इसके गवर्नर थे.