'कांग्रेस की दलित-विरोधी मानसिकता के कारण ही हुआ BSP का जन्म', मायावती का राहुल गांधी पर तीखा पलटवार

बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस की दलित-विरोधी मानसिकता की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने समर्थकों को कांग्रेस से सावधान रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि बाबा साहेब और कांशी राम का कांग्रेस ने कभी सम्मान नहीं किया.

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Kanhaiya Kumar Jha

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दलितों की विरासत को लेकर घमासान छिड़ गया है. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उसे 'दलित विरोधी' करार दिया है. यह विवाद तब गहराया जब राहुल गांधी ने कांशी राम की जयंती पर लखनऊ में उन्हें श्रद्धांजलि दी. मायावती का मानना है कि कांग्रेस केवल वोट बैंक के लिए दिखावा कर रही है, जबकि उनका इतिहास हमेशा से दलितों के दमन का रहा है.

मायावती ने सोशल मीडिया पर कहा कि बसपा का जन्म ही कांग्रेस की दलित-विरोधी सोच के कारण हुआ था. दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने दलितों का उत्थान नहीं किया. वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए दलित महापुरुषों के नाम का सहारा लेती है. समर्थकों को ऐसी चालों से सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस की नीतियां हमेशा बहुजन समाज के हितों के खिलाफ रही हैं.

बाबा साहेब की अनदेखी 

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बाबा साहेब अंबेडकर का कभी वास्तविक आदर नहीं किया. उन्हें 'भारत रत्न' देने में भी भारी देरी की गई और उनके योगदान को दबाने की कोशिश हुई. जब कांग्रेस ने दलितों के सबसे बड़े मसीहा का सम्मान नहीं किया, तो वे कांशी राम का आदर करने का दिखावा कैसे कर सकते हैं? यह दलित समाज के बीच भ्रम फैलाने की साजिश है.

कांशी राम के निधन का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया. यहां तक कि यूपी की सपा सरकार ने भी राजकीय शोक नहीं मनाया था. यह उपेक्षा दर्शाती है कि इन पार्टियों के मन में दलित नेताओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है. ये दल केवल चुनावी मौसम में ही दलितों की विरासत को भुनाने की कोशिश करते हैं.

राहुल गांधी पर पलटवार 

राहुल गांधी के बयान 'अगर नेहरू होते तो कांशी राम मुख्यमंत्री होते' पर पलटवार करते हुए उन्होंने इसे कोरा झूठ बताया. मायावती ने कहा कि विपक्षी दल बसपा को कमजोर करने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं. राहुल का बयान केवल दलित वोट बैंक को लुभाने की कोशिश है. बसपा के अस्तित्व को चुनौती देने वाली इन ताकतों से सावधान रहना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है.

बसपा की मजबूती का संकल्प 

अंत में मायावती ने कार्यकर्ताओं से पार्टी की विचारधारा पर अडिग रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि अन्य दल दलित संगठनों को मोहरा बनाकर बसपा को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. दलित समाज के अधिकारों की रक्षा केवल बसपा ही कर सकती है. कांग्रेस की दलित-विरोधी मानसिकता के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और समर्थकों को अपनी जड़ों और मान्यवर कांशी राम के सिद्धांतों से जुड़े रहना चाहिए.