IPL 2026

लखनऊ में आग का तांडव, एक के बाद एक सिलिंडर फटने से 500 झोपड़ियां जलकर खाक, सामने आया वीडियो

लखनऊ के विकास नगर में बुधवार शाम भीषण आग में लगभग पांच सौ झोपड़ियां जलकर राख हो गईं. कई सिलिंडर फट गए. लाखों रुपये का सामान जल गया. कई बच्चे लापता बताए जा रहे हैं.  

@tusharcrai
Kanhaiya Kumar Jha

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार की शाम एक बड़ी दर्दनाक घटना सामने आई. विकास नगर सेक्टर 14 में रिंग रोड के किनारे खाली प्लाट में बनी लगभग पांच सौ झोपड़ियों में अचानक आग लग गई. हालात इतने भयानक थे कि करीब दस किलोमीटर दूर से धुआं उठता देखा गया. आग के साथ-साथ एक के बाद एक कई गैस सिलिंडरों में जोरदार विस्फोट हुए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई. लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया. आग में कई बच्चों के लापता होने की सूचना मिली है.  

तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू

आग की सूचना शाम 5:47 बजे मिली. मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल ने बताया कि तुरंत इंदिरानगर, गोमती नगर, हजरतगंज सहित कई थानों से 20 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. हालांकि रिंग रोड पर लगे जाम के कारण कई गाड़ियां फंस गईं, जिन्हें निकालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. आग बुझाने में करीब तीन घंटे लग गए. एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की बिजली काट दी गई. आसपास के लगभग 50 मकानों को खाली कराया गया. डीजी फायर सुजीत पांडेय, डीसीपी पूर्वी दीक्षा शर्मा भी मौके पर पहुंचे. राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम करीब तीन घंटे बाद पहुंची.  

लोगों ने लगाया देरी से पहुंचने का आरोप

पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस और दमकल विभाग काफी देर से मौके पर पहुंचे. कई लोगों की पुलिस से झड़प भी हुई. भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने पत्थर चलाए, जिसमें लोहिया नगर में सिविल डिफेंस के पोस्ट वार्डन ऋषि श्रीवास्तव के सिर में गंभीर चोट आई. आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक झोपड़ी में विस्फोट हुआ और फिर देखते ही देखते आग ने चारों तरफ फैलना शुरू कर दिया.  

लापता बच्चों की तलाश में बेचैन परिजन

इस भीषण आग में सबसे दर्दनाक पहलू कई बच्चों का लापता होना है. सीतापुर निवासी रहमान ने बताया कि उनके चार बच्चे थे, घटना के समय सब सो रहे थे. वह तो किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन दो बच्चे अंदर ही फंस गए हैं. बाराबंकी के बड्डूपुर निवासी सकटू की आंखों में आंसू थे- उनकी केवल पंद्रह दिन की बेटी भी आग में फंस गई और उसका कोई पता नहीं है. एक अन्य पीड़ित विपिन ने बताया कि उनके रिश्तेदार के दो बच्चे अब भी लापता हैं. इन झोपड़ियों में लगभग दो हजार लोग रहते थे. अब उनके पास सिर्फ राख का ढेर बचा है.