सावन के तीसरे सोमवार पर शिवभक्ति में डूबी काशी, नाग पंचमी के संयोग ने बढ़ाया उत्साह

सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग पर काशी में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर प्रमुख शिवालयों और नागकूप तक हर ओर हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे.

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Shanu Sharma

सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के खास संयोग पर वाराणसी पूरी तरह शिवभक्ति में रंगी नजर आई. काशी के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मंगल आरती के बाद पट खुलते ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया.

बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही मंदिर के बाहर बैरिकेडिंग में कतारबद्ध हो गए थे. मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों का गुलाब की पंखुड़ियों से स्वागत किया गया. गंगा घाट से लेकर काशी विश्वनाथ धाम तक कांवरियों का हुजूम नजर आया. हाथों में गंगाजल लिए कांवरिए बोल बम के जयकारे लगाते हुए बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते रहे.

सुबह सात बजे तक 1.10 लाख भक्तों ने किए दर्शन

तीसरे सोमवार पर काशी में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे. भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के खास प्रबंध किए गए हैं. श्रद्धालुओं को धूप और बारिश से राहत देने के लिए परिसर और आसपास जर्मन हैंगर लगाए गए हैं.


इसके अलावा जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था की गई है. मेडिकल कैंप और खोया-पाया केंद्र भी बनाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी होने पर मदद मिल सके. मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह सात बजे तक करीब एक लाख 10 हजार श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन और पूजन कर चुके थे.

प्रमुख शिवालयों में गूंजा हर हर महादेव

काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा बीएचयू विश्वनाथ मंदिर, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर और महामृत्युंजय मंदिर समेत शहर के तमाम छोटे-बड़े शिवालयों में भी भक्तों की भीड़ रही. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया. नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता को दूध, लावा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई.

नाग पंचमी पर जैतपुरा स्थित नागकूप में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. भक्तों ने नाग देवता के दर्शन किए और जल, दूध, फल, मिष्ठान और लावा अर्पित कर पूजा-अर्चना की. वहीं अखाड़ों में कुश्ती और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी हुआ. इस तरह सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग ने काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक छटा को और खास बना दिया.