श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर हलचल तेज, आज कारसेवा का शंखनाद; देशभर से पहुंचे संत-महंत!
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान की मुक्ति की मांग को लेकर आज हवन-पूजन का आयोजन किया जा रहा है. गोवर्धन स्थित श्रीचित्रगुप्त पीठ में देशभर से संत-महंत जुटे हैं. इसी आयोजन के साथ कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा, जबकि शिलापूजन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है.
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर धार्मिक गतिविधियां एक बार फिर से तेज हो गई हैं. आज गोवर्धन स्थित श्रीचित्रगुप्त पीठ में हवन-पूजन के साथ कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा. आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे संत-महंत शामिल होंगे. सुबह नौ बजे से विधि-विधान के साथ हवन और पूजन शुरू होगा.
पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि अयोध्या, मुंबई, हरिद्वार, दिल्ली और वृंदावन से आए संतों की अगुवाई में यह धार्मिक आयोजन किया जाएगा. इसका उद्देश्य श्रीकृष्ण जन्मस्थान को जल्द मुक्त कराने की कामना के साथ कारसेवा के लिए आगे की रणनीति तय करना है.
कारसेवा की हुई थी घोषणा
डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने चार जुलाई को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर अयोध्या में राम मंदिर की तर्ज पर कारसेवा किए जाने की घोषणा की थी. इसके बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी इस अभियान को समर्थन दिया और नौ अगस्त को कारसेवा की घोषणा की थी. हालांकि, कांवड़ यात्रा को देखते हुए बाद में कारसेवा की प्रस्तावित तारीख को स्थगित कर दिया गया.
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पत्थरों पर दिखेगी राधा-कृष्ण की बाल-लीला
इसके बीच राजस्थान के भरतपुर से शिलाएं मंगाए जाने के बाद प्रशासन की गतिविधियां भी बढ़ गईं. मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात करीब पांच सौ घन मीटर पत्थर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गया. इन पत्थरों को मंदिर निर्माण के लिए तराशे जाने की तैयारी है. इसके लिए ओडिशा से खास तौर पर 20 कारीगरों को बुलाया गया है. ये कारीगर पत्थरों पर ब्रज संस्कृति और राधा-कृष्ण की बाल लीलाओं को कलात्मक रूप से उकेरेंगे. हालांकि, फिलहाल शिलापूजन और पत्थरों को तराशने का कार्यक्रम रोक दिया गया है.
कारसेवा का शंखनाद करने का निर्णय
प्रशासन की ओर से भी कार्यक्रम स्थगित करने के लिए आयोजकों से संपर्क किया गया था. इसके बावजूद हवन-पूजन के जरिए कारसेवा का शंखनाद करने का निर्णय लिया गया है. डॉ. सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, अभी श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर वास्तविक कारसेवा की तारीख तय नहीं की गई है. शिलापूजन भी फिलहाल रोक दिया गया है. अन्य संतों से विचार-विमर्श और उनकी सहमति के बाद आगे की तारीख घोषित की जाएगी. आज के इस आयोजन को सीधे तौर पर कारसेवा शुरू करने के बजाय उसके लिए धार्मिक और सांकेतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.