menu-icon
India Daily

काशी में खतरे के निशान के करीब गंगा, 84 घाट जलमग्न; PM मोदी ने लिया जायजा

धर्मनगरी काशी में गंगा का रौद्र रूप तटीय बस्तियों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. पहाड़ों और मैदानी इलाकों से लगातार आ रहे पानी के चलते वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर को पार करते हुए 70.56 मीटर पर पहुंच गया है.

Shilpa Shrivastava
Nityanand Mishra
Reported By: Nityanand Mishra
काशी में खतरे के निशान के करीब गंगा, 84 घाट जलमग्न; PM मोदी ने लिया जायजा
Courtesy: India Daily

काशी: ​धर्मनगरी काशी में गंगा का रौद्र रूप तटीय बस्तियों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. पहाड़ों और मैदानी इलाकों से लगातार आ रहे पानी के चलते वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर को पार करते हुए 70.56 मीटर पर पहुंच गया है. नदी अब खतरे के निशान 71.262 मीटर से महज 70 सेंटीमीटर की दूरी पर है. हालांकि पिछले दिनों 5 से 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की तेज गति से बढ़ रहा पानी अब वर्तमान में 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन जलस्तर का लगातार ऊपर चढ़ना खतरे का संकेत बना हुआ है.

घाट सिकुड़े, संपर्क टूटा:  नाविकों, तीर्थ पुरोहितों और पटरी कारोबारियों पर दोहरी मार

​गंगा के उफान से काशी के सभी 84 घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं. घाटों का दायरा सिमट चुका है और एक घाट से दूसरे घाट का संपर्क पूरी तरह कट गया है. सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन द्वारा नौका संचालन पर रोक लगाए जाने से पर्यटकों की आवाजाही ठप पड़ गई है. इसका सीधा असर घाट किनारे जीवन यापन करने वालों पर पड़ा है

​पीएम नरेंद्र मोदी ने लिया प्रशासनिक व नगरीय व्यवस्थाओं का जायजा:

​काशी के इस गंभीर परिदृश्य पर खुद सांसद एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी संवेदनशीलता से निगरानी रख रहे हैं. प्रधानमंत्री ने वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार और महापौर अशोक कुमार तिवारी से फोन पर विस्तार से जमीनी स्थिति और राहत कार्यों का जायजा लिया.

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को निर्देश:

  • ​राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर जारी रखा जाए, ताकि प्रभावित नागरिकों को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े.

  • ​जिन क्षेत्रों में राहत सामग्री या राशन की अतिरिक्त आवश्यकता दिखे, वहां त्वरित गति से अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

  • ​राहत शिविरों में रह रहे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की पोषण, दूध और दवाओं जैसी संवेदनशील आवश्यकताओं का विशेष प्राथमिकता के साथ ध्यान रखा जाए.

महापौर अशोक तिवारी और नगर निगम को निर्देश:

  • ​नगर निगम के राहत शिविरों में गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, नियमित फॉगिंग और बुनियादी सुविधाओं की निरंतरता बनी रहे.

  • नगर निगम के सभी पार्षद और स्थानीय जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय मजबूत कर सीधे प्रभावित बस्तियों में सक्रिय रहें, ताकि पीड़ितों को तत्काल सहयोग मिल सके.

प्रधानमंत्री द्वारा ली गई इस विस्तृत समीक्षा से जमीनी स्तर पर चल रहे राहत एवं बचाव अभियानों को और अधिक गति मिली है. वरुणा और गंगा के प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ, जल पुलिस और प्रशासनिक टीमों के बीच तालमेल और मजबूत करते हुए राहत शिविरों में व्यवस्थाओं की सघन निगरानी की जा रही है.