राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय का इस्तीफा, जानिए प्रोफेसर से आंदोलन के सूत्रधार बनने तक का सफर
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय एक बार फिर चर्चा में हैं. शिक्षक से लेकर राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार बनने तक उनका सफर लंबे सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों से जुड़ा रहा है.
लखनऊ: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे ने उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को फिर चर्चा में ला दिया है. राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे चंपत राय ने शिक्षा क्षेत्र से अपने करियर की शुरुआत की थी. बाद में उन्होंने सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों को जीवन का लक्ष्य बनाया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका ने उन्हें देशभर में एक अलग पहचान दिलाई.
चंपत राय ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में की थी. शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाई. हालांकि आगे चलकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन और सामाजिक कार्यों को अपना पूर्णकालिक कार्यक्षेत्र बना लिया.
इमरजेंसी ने बदली जीवन की दिशा
वर्ष 1975 में देश में लागू आपातकाल उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 18 महीने जेल में रहना पड़ा. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने अध्यापन कार्य छोड़ दिया और संगठनात्मक गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय हो गए.
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संघ में बढ़ती जिम्मेदारियां
शिक्षण सेवा छोड़ने के बाद चंपत राय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने. संगठन ने उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारियां सौंपीं. वर्ष 1991 में उन्हें अयोध्या क्षेत्र में कार्यभार दिया गया. यहां से उनका जुड़ाव राम जन्मभूमि आंदोलन के साथ और अधिक मजबूत होता चला गया.
विश्व हिंदू परिषद में महत्वपूर्ण भूमिका
विश्व हिंदू परिषद में चंपत राय ने कई अहम पदों पर कार्य किया. केंद्रीय सचिव, संयुक्त महासचिव, अंतरराष्ट्रीय महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे दायित्व निभाते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया. प्रशासनिक क्षमता और संगठन कौशल के कारण वे परिषद के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे.
राम मंदिर आंदोलन में अहम योगदान
राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े कानूनी और संगठनात्मक प्रयासों में चंपत राय की भूमिका महत्वपूर्ण रही. उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों और साक्ष्यों को व्यवस्थित करने में योगदान दिया. वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के बाद उन्हें महासचिव बनाया गया. दशकों तक आंदोलन से जुड़े रहने और प्रशासनिक अनुभव के कारण वे ट्रस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहे.