मां की चीख सुन हर किसी का पसीज गया दिल, लखनऊ अग्निकांड में हुई दो बेटों की मौत पर आंसुओं से डूबा पूरा मोहल्ला
संयम विज और सूरजभान सिंह लखनऊ में काम करते थे. आग की इस दुर्घटना में दोनों की मौत हो गई. जब उनके शव घर लाए गए तो परिवार वालों पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा. संयम की मां बेटे का शव देखते ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं.
कानपुर: "एक बार आंख खोल लो बेटा... मेरे लाल को मत ले जाओ..." यह चीख सुनकर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं. लखनऊ के भीषण अग्निकांड में अपनी जान गंवाने वाले दो युवकों के शव जब कानपुर स्थित उनके घर पहुंचे, तो पूरे मोहल्ले में मातम छा गया. मां-बहनों की चीखें आसमान छू रही थीं और हर कोई इस दर्द को देखकर सन्न रह गया.
दो बेटों की मौत पर आंसुओं से डूबा पूरा मोहल्ला
संयम विज और सूरजभान सिंह लखनऊ में काम करते थे. आग की इस दुर्घटना में दोनों की मौत हो गई. जब उनके शव घर लाए गए तो परिवार वालों पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा. संयम की मां बेटे का शव देखते ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं. वे बार-बार रोते हुए कह रही थीं, 'हे भगवान, मेरा बच्चा वापस कर दो.' बहनें भी रो-रोकर बेसुध हो रही थीं. रिश्तेदार और पड़ोसी उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दर्द इतना गहरा था कि कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था.
सूरजभान सिंह के घर का मंजर भी कम दर्दनाक नहीं था. जिस बेटे के आने का इंतजार मां कर रही थी, वह हमेशा के लिए चुपचाप लौट आया. सूरजभान हर रविवार को घर आया करते थे. परिवार के लोग हर हफ्ते उनका इंतजार करते थे. लेकिन इस बार रविवार की जगह उनकी अर्थी घर आई. पूरा मोहल्ला आंसुओं में डूब गया. गलियों में सन्नाटा पसरा था. लोग बस एक-दूसरे को देख रहे थे, शब्दों की कमी महसूस हो रही थी.
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दादी की तेरहवीं पर पोते की अर्थी
सबसे दिल दहला देने वाली बात यह रही कि ठीक उसी दिन जब सूरजभान की दादी की तेरहवीं थी, उसी दिन पोते की अर्थी निकली. एक तरफ दादी की आत्मा को शांति पहुंचाने की तैयारी चल रही थी, दूसरी तरफ पोता हमेशा के लिए घर से जा रहा था. इस दोहरी मातम ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया. लखनऊ अग्निकांड ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं. संयम और सूरजभान दोनों ही अपने परिवार की उम्मीद और सहारा थे.