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SIR का दबाव नहीं झेल पाया एक और BLO! हार्टअटैक आने से हुई मौत, यूपी में अब तक 8 की गई जान

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची संशोधन अभियान के दौरान अमरोहा के एक हेडमास्टर अरविंद कुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गई. 10 दिनों में यह आठवीं मौत है, जिनमें तीन लोगों ने खुदकुशी की.

@SupriyaShrinate
Sagar Bhardwaj

सांभर जिले के चौकूनी गांव के रहने वाले 40 वर्षीय हेडमास्टर अरविंद कुमार की सोमवार को अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. वे इन दिनों स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत सहायक बूथ लेवल ऑफिसर के रूप में तैनात थे. परिवार का कहना है कि लगातार बढ़ते काम के दबाव ने उनकी सेहत पर असर डाला. पति की मौत से पत्नी प्रतिभा और दो बच्चों गरिमा (13) और लाविश (10) पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है.

काम की वजह से मानसिक दबाव में थे अरविंद कुमार

अरविंद कुमार अमरोहा जिले के फैयाजनगर स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर थे. सोमवार सुबह जब पत्नी ने उन्हें जगाने की कोशिश की, तो वे बेहोश पड़े थे. गांव वालों की मदद लेने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. परिवार ने बताया कि बीते कुछ दिनों से वे मानसिक दबाव में दिखाई दे रहे थे.

BLO डेडलाइन का बढ़ता दबाव

अरविंद के साले और SIR कार्य में उनके साथी लाल सिंह ने बताया कि उन पर मतदाता सूची संशोधन के लक्ष्य पूरे करने का भारी दबाव था. उनका कहना है कि यदि समय सीमा पहले बढ़ा दी जाती जैसे अब 11 दिसंबर तक बढ़ाई गई है तो शायद यह हादसा टल सकता था.

शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक काम का बोझ

हालांकि हेडमास्टर का मुख्य काम स्कूल प्रशासन देखना होता है, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों के तहत उन्हें BLO ड्यूटी में लगाया जाता है. फरवरी 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि शिक्षकों को तभी लगाया जाए जब कोई विकल्प न हो, मगर यूपी में स्टाफ की कमी के कारण यह व्यवस्था जारी है.

10 दिनों में आठ मौतें, तीन आत्महत्या

अरविंद से पहले सात BLO की मौत हो चुकी है. इनमें मोरादाबाद के शिक्षक सर्वेश सिंह, फतेहपुर के लेखपाल सुदीर कुशवाहा और गोंडा के शिक्षक विपिन यादव ने दबाव के चलते आत्महत्या कर ली थई. चार अन्य कर्मियों की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई.

चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल

लगातार हो रही मौतों के बावजूद यूपी के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है. बढ़ते मामलों ने SIR अभियान के दबाव और कार्य परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.