यूपी की खेती बचाने के लिए कृषि मंत्री शिवराज और सीएम योगी ने बनाया बड़ा प्लान, किसानों को मिलेंगे कई फायदे
लखनऊ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि व ग्रामीण विकास पर चर्चा की. जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने और वैज्ञानिक कृषि रणनीति पर विशेष जोर दिया गया.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस दौरान कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास, जलवायु परिवर्तन और खरीफ सीजन की तैयारियों पर विस्तार से मंथन हुआ. बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को मजबूत करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के जरिए खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया.
जलवायु परिवर्तन के बीच नई कृषि रणनीति
बैठक में सबसे अधिक चर्चा बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के प्रभावों को लेकर हुई. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक सोच और दीर्घकालिक रणनीति जरूरी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को नई तकनीकों, उन्नत बीजों और आधुनिक खेती के तरीकों से जोड़ा जाए. बैठक में यह भी तय किया गया कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए एक व्यापक कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके.
खरीफ सीजन की तैयारियों पर विशेष फोकस
बैठक में आगामी खरीफ सीजन को लेकर भी विस्तृत समीक्षा की गई. संभावित कम बारिश और मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए सूखा सहनशील बीजों के उपयोग, वैकल्पिक फसल योजनाओं और जिला स्तर पर आपात रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई. अधिकारियों ने बताया कि किसानों को समय पर सलाह और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां तेज की जा रही हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और दलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया.
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जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक पर जोर
बैठक में भूजल स्तर में गिरावट और बढ़ती जल आवश्यकता को देखते हुए जल संरक्षण को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी. माइक्रो इरिगेशन, ड्रिप सिंचाई, वर्षा जल संचयन और कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई गई. धान की खेती में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक के उपयोग पर भी बल दिया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से न केवल जल की बचत होगी, बल्कि उत्पादन लागत में भी कमी आएगी और किसानों को अधिक लाभ मिलेगा.
किसानों और ग्रामीण विकास के लिए बड़े कदम
बैठक में किसानों और ग्रामीण परिवारों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर भी चर्चा हुई. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना और मसूर की खरीद अवधि बढ़ाने का निर्णय किसानों के लिए राहतभरा माना जा रहा है. वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत उत्तर प्रदेश को लाखों नए मकानों की स्वीकृति भी दी गई है. केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर प्रदेश को कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल राज्य बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई. इस दिशा में किसानों की आय बढ़ाने और गांवों को अधिक समृद्ध बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे.