यूपी चुनाव जीतने के लिए भाजपा का मास्टरस्ट्रोक: अनुभवी चेहरों पर लगेगा दांव, 501 नए प्रभारियों की तलाश तेज

 उत्तर प्रदेश में भाजपा ने चुनावी सफलता के लिए नई सोशल इंजीनियरिंग रणनीति अपनाई है, जिसके तहत हाशिए पर चल रहे अनुभवी और खांटी कार्यकर्ताओं को 501 प्रभारियों के रूप में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी.

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Sagar Bhardwaj

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी सांगठनिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है. पार्टी ने अब नई सोशल इंजीनियरिंग की राह पकड़ते हुए अनुभव की पूंजी रखने वाले पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन के पुराने पदाधिकारियों से भावनात्मक तार जोड़ने का फैसला किया है. इस नई रणनीति के तहत उपेक्षित पड़े पुराने नेताओं को पार्टी की वास्तविक नींव बताकर नए कार्यकर्ताओं के बीच एक बड़ा एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है.

 हाशिए पर चल रहे खांटी नेताओं की खोज

रणनीति के क्रियान्वयन के लिए भाजपा ने सभी संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों से ऐसे समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं की विस्तृत सूची मांगी है, जो पहले कभी संगठन या सरकार में सक्रिय भूमिका में थे लेकिन आज किसी कारणवश हाशिए पर हैं. अब विभिन्न क्षेत्रों के प्रवास पर जाने वाले सभी वर्तमान पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे सबसे पहले इन पुराने नेताओं से मुलाकात करेंगे और इसकी पूरी ग्राउंड रिपोर्ट सीधे संगठन महामंत्री को सौंपेंगे.

 समन्वय और अनुशासन पर विशेष जोर

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में लखनऊ प्रवास के दौरान साफ किया कि संगठन को मजबूत करने के लिए पुराने नेताओं के रणनीतिक और व्यावहारिक अनुभव से मार्गदर्शन लेना बेहद जरूरी है. वहीं, प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि समन्वय सिर्फ सरकार और वर्तमान संगठन के बीच ही नहीं, बल्कि पूर्व सांसदों, विधायकों और जिला प्रभारियों के साथ भी जरूरी है. इसी सनातन परंपरा और मार्गदर्शन को ध्यान में रखकर पार्टी आगे बढ़ रही है.


प्रभारियों की नियुक्ति के कड़े मापदंड

इस नए अभियान के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों और 98 संगठनात्मक जिलों सहित मोर्चों के लिए कुल 501 प्रभारियों की एक नई सूची जारी होने वाली है. पार्टी ने तय किया है कि विधानसभा प्रभारियों की राजनीतिक उम्र, कद और उपलब्धियां उस क्षेत्र के संभावित चुनावी प्रत्याशी से अधिक होनी चाहिए. इससे न केवल संगठन के भीतर एक स्वाभाविक अनुशासन का माहौल तैयार होगा, बल्कि टिकट न मिलने पर होने वाली गुटबाजी को भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा.