राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सोशल मीडिया पर पुलिस की सख्ती, भ्रामक पोस्ट पर बढ़ी निगरानी

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजरें तेज हो गई हैं. जांच से जुड़ी अफवाहों और भ्रामक दावों को रोकने के लिए पुलिस ने निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया है.

ANI
Meenu Singh

अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजरें तेज हो गई हैं. जांच से जुड़ी अफवाहों और भ्रामक दावों को रोकने के लिए पुलिस ने निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया है. विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही सामग्री की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की गलत सूचना या भड़काऊ पोस्ट से कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द प्रभावित न होने पाए.

सोशल मीडिया पर बढ़ाई गई निगरानी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को संवेदनशील मानते हुए पुलिस ने सोशल मीडिया की विशेष निगरानी शुरू कर दी है. फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री पर लगातार नजर रखी जा रही है. इसके लिए सोशल मीडिया सेल और सोशल वॉलंटियर भी सक्रिय किए गए हैं, जो संदिग्ध पोस्ट की पहचान कर संबंधित प्लेटफॉर्म को सूचना दे रहे हैं.

भ्रामक पोस्ट पर हो रही कार्यवाही

सूत्रों के अनुसार, जांच को प्रभावित करने वाली या धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली सामग्री पर तुरंत कार्यवाही की जा रही है. गोरखपुर जोन में इस मामले से जुड़ी 127 आपत्तिजनक या भ्रामक पोस्ट हटवाई जा चुकी हैं. कुछ पोस्ट ब्लॉक कराई गई हैं, जबकि कई मामलों में संबंधित सोशल मीडिया खातों की पहचान करने की प्रक्रिया भी जारी है.


जांच प्रभावित न हो, इस पर जोर

पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद सभी जिलों को सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कहा गया है. विशेष रूप से ऐसी पोस्ट पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें अपुष्ट जानकारी, अफवाह या जांच को प्रभावित करने वाले दावे किए जा रहे हों. अधिकारियों का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना और किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति को रोकना है.

अधिकारियों ने नहीं दी आधिकारिक प्रतिक्रिया

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने निगरानी अभियान को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है. फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी पोस्ट से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने, अफवाह फैलने या कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका मिली, तो संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में किसी भी जानकारी की सत्यता जांचे बिना उसे साझा करना जोखिम भरा हो सकता है. एआई और एडिटिंग तकनीकों के कारण भ्रामक सामग्री तेजी से फैल सकती है. इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट पोस्ट को साझा करने से बचें.