लॉरेंस के नाम पर 2 करोड़ की फिरौती मांगने वाला AMU क्लर्क गिरफ्तार, जुए में हार गया था 80 लाख रुपए
अलीगढ़ पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी भरे पत्र भेजकर करोड़ों रुपये की फिरौती मांगने वाले आरोपी को पुलिस ने 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया. आरोपी एएमयू का कर्मचारी बताया गया है.
अलीगढ़ में प्रतिष्ठित लोगों को भेजे गए धमकी भरे पत्रों ने पिछले कुछ दिनों से चिंता का माहौल बना दिया था. पत्रों में खुद को कुख्यात गैंग से जुड़ा बताकर बड़ी रकम की मांग की गई थी. मामला सामने आते ही पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी. तेजी से की गई कार्रवाई के बाद पुलिस ने 48 घंटे के भीतर एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा करने का दावा किया है. आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं.
स्पीड पोस्ट से भेजे गए धमकी भरे पत्र
पुलिस के अनुसार शहर के कई प्रतिष्ठित लोगों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से धमकी भरे पत्र भेजे गए थे. इन पत्रों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम इस्तेमाल करते हुए भारी रकम की मांग की गई थी. एक प्रसिद्ध चिकित्सक को भेजे गए पत्र में 22 हजार अमेरिकी डॉलर की फिरौती मांगी गई थी. साथ ही रकम नहीं देने पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई थी. पत्रों की भाषा और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों ने प्राप्तकर्ताओं को चिंता में डाल दिया था. मामला पुलिस तक पहुंचा तो जांच एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं.
आठ लोगों को बनाया गया निशाना
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था. तीन जून को नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित डाकघर से अलीगढ़ के आठ प्रमुख लोगों को इसी तरह के पत्र भेजे गए थे. इनमें कारोबारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं. पत्रों में बिटकॉइन और क्यूआर कोड के जरिए करीब दो करोड़ रुपये की फिरौती देने की बात कही गई थी. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को और गंभीरता से लिया. अधिकारियों को आशंका थी कि यदि आरोपी जल्द नहीं पकड़ा गया तो और लोगों को भी निशाना बनाया जा सकता था.
सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
मामले के खुलासे के लिए सिविल लाइन थाना पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग की संयुक्त टीम बनाई गई. जांच के दौरान डाकघरों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर पुलिस एक संदिग्ध तक पहुंची. उसकी पहचान हसमत हुसैन के रूप में हुई, जो एएमयू का कर्मचारी बताया गया है. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में गिरफ्तार कर लिया. अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्य आरोपी की भूमिका की पुष्टि करते हैं.
पुलिस को मिला इनाम
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से घटना के समय पहनी गई टी-शर्ट, एक बैग और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद किया. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने बताया कि मामले के त्वरित खुलासे में शामिल टीम ने लगातार मेहनत की, जिसके चलते 48 घंटे के भीतर आरोपी तक पहुंचना संभव हो सका. पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए संबंधित टीम के लिए 25 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा भी की गई है. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है.