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'BJP फंड नहीं पहुंचने देती', अखिलेश यादव ने बताई I-PAC से करार खत्म करने की वजह

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ई-पैक कंपनी से अपना पुराना करार समाप्त कर दिया है.कंपनी को पार्टी के चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली थी. अखिलेश यादव ने इसके पीछे आर्थिक तंगी और भाजपा के राजनीतिक दबाव को प्रमुख कारण बताया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन अभी से ही सभी राजनितिक पार्टियों के तमाम तरह के राजनीतिक समीकरण नजर आने लगे हैं. वही बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी की करारी हार के बाद विपक्षी खेमें में जबरदस्त हलचल मची हुई है और बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए सभी पार्टियां रणनीति बनाने में जुटी है. इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान प्रसिद्ध चुनावी रणनीति कंपनी आई-पैक के साथ अपना गठबंधन तोड़ने की घोषणा की. 

अखिलेश ने सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र के माध्यम से उनकी पार्टी के संसाधनों को रोका जा रहा है. संसाधनों की इस कमी और आंतरिक चुनौतियों के चलते पार्टी ने अब अपना रास्ता बदलने का निर्णय लिया है. अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि आई-पैक के साथ सपा की साझेदारी अब पूरी तरह खत्म हो गई है. उन्होंने इस अलगाव का सबसे बड़ा कारण पार्टी की वर्तमान आर्थिक तंगी को बताया है. सपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि यह फैसला किसी चुनावी हार के दबाव में नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से वित्तीय सीमाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. 

बीजेपी पर लगाए दबाव बनाने के आरोप

सत्ताधारी दल पर हमलावर होते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव के कारण समाजवादी पार्टी तक जरूरी संसाधन नहीं पहुंच पा रहे हैं. उन्होंने इसे विपक्षी दलों को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया. संसाधनों के इस संकट ने सपा को अपने चुनावी प्रबंधन और रणनीतिक ढांचे में बड़े बदलाव करने के लिए मजबूर किया है. अखिलेश ने कहा कि अब वे किसी बाहरी एजेंसी के बजाय केवल अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के भरोसे चुनावी समर में उतरेंगे.


कैसे विवादों में आई-पैक?

प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित आई-पैक कंपनी हाल के दिनों में कई कानूनी और राजनीतिक विवादों में घिरी रही है. कंपनी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल का नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में सामने आया था, जिसकी जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं. हालांकि चंदेल को जमानत मिल चुकी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में कंपनी की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव विवादित संस्थाओं से दूरी बनाकर अपनी छवि को बेदाग रखना चाहते हैं.

पीडीए फार्मूला और अधिक मजबूत बनाने पर दिया जोर

भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए अखिलेश ने कहा कि अब वे अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करेंगे. पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ मजबूती से जुड़ी रहेगी और भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ साझा लड़ाई जारी रखेगी. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मतगणना की लाइव स्ट्रीमिंग कराने की पुरजोर वकालत की है. पार्टी अब बाहरी रणनीतिकारों के स्थान पर अपने जमीनी संगठन को सशक्त कर सीधे जनता तक अपनी बात पहुंचाएगी.