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'हम दो-हमारे दो दर्जन', ओवैसी के पार्टी के नेता का नया नारा, देश के बड़े कुंवारे नेताओं पर कसा तंज

एआईएमआईएम के यूपी प्रमुख शौकत अली ने मुरादाबाद की जनसभा में मुसलमानों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए कहा- 'हम दो-हमारे दो दर्जन' होने चाहिए. उन्होंने बड़ी जनसंख्या को देश की ताकत बताया और कुंवारे नेताओं पर तंज कसा. सपा को भाजपा की 'बी टीम' कहने पर पलटवार किया.

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Kuldeep Sharma

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बहस फिर गरमा गई है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रदेश प्रमुख शौकत अली ने सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा में एक सभा को संबोधित करते हुए जनसंख्या पर विवादास्पद बयान दिया. उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे परिवार नियोजन की बजाय ज्यादा संतान पैदा करें, क्योंकि बड़ी आबादी देश को मजबूत बनाती है.

शौकत अली ने धार्मिक आधार पर बच्चों को ईश्वर की देन बताते हुए रोकने की कोशिश को गलत ठहराया. उनका यह बयान सरकारी नीतियों के खिलाफ जाता है और राजनीतिक दलों में तीखी प्रतिक्रियाएं उभर रही हैं.

जनसंख्या को ताकत बताने का तर्क

शौकत अली ने सभा में कहा कि दुनिया के बड़े देशों की सफलता उनकी विशाल जनसंख्या में छिपी है. उन्होंने मुसलमानों से कहा कि 'हम दो-हमारे दो दर्जन' का नारा अपनाएं, क्योंकि बच्चे अल्लाह की नेमत हैं. उनका मानना है कि आबादी बढ़ने से राष्ट्र कमजोर नहीं, बल्कि और शक्तिशाली होता है. इस बयान ने सामाजिक और आर्थिक बहस को नया मोड़ दिया है.

कुंवारे नेताओं पर निशाना

शौकत अली ने जनसंख्या नियंत्रण की पैरवी करने वालों पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि जो नेता खुद शादीशुदा नहीं या परिवार नहीं बनाते, वे दूसरों को उपदेश देते हैं. उनका इशारा सत्ता पक्ष के कुछ प्रमुख चेहरों की ओर था. साथ ही, मुरादाबाद के मदरसों को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिशों पर नाराजगी जताई और कहा कि मदरसे शिक्षा के केंद्र हैं.

सपा पर भड़ास और पलटवार

शौकत अली ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला. एक सपा विधायक के एआईएमआईएम को भाजपा की 'बी टीम' कहने पर उन्होंने कहा कि सपा अपनी हार छिपाने के लिए झूठ बोल रही है. मुसलमानों के हक की बात करने वाले को ही सच्चा नेता बताते हुए उन्होंने सपा की वोट बैंक राजनीति पर सवाल उठाया.

सियासी घमासान और प्रतिक्रियाएं

शौकत अली के बयान पर भाजपा समेत अन्य दलों ने कड़ी आलोचना की है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान ध्रुवीकरण बढ़ाते हैं और विकास के मुद्दों से ध्यान हटाते हैं. सोशल मीडिया पर लोग बंटे हुए हैं, कुछ समर्थन तो कुछ विरोध कर रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं.