पत्नी से हुए विवाद के बाद पति ने 16वीं मंजिल से लगा दी छलांग, बेरोजगारी से भी था परेशान
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक युवक ने 16वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. घरेलू विवाद, बेरोजगारी और मानसिक तनाव को इसकी वजह माना जा रहा है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
ग्रेटर नोएडा: यूपी के गौतमबुद्धनगर जिले के ग्रेटर नोएडा से एक बेहद ही दुखद मामला सामने आया है. यहां एक आवासीय सोसायटी में रहने वाले युवक ने 16वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. शुरुआती जांच में पारिवारिक तनाव और बेरोजगारी को इस कदम की वजह बताया जा रहा है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है.
यह घटना ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पैरामाउंट इमोशंस सोसायटी की बताई जा रही है. सुबह के समय जब लोगों ने सोसायटी परिसर में युवक का शव देखा, तो अफरा-तफरी मच गई. आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षेत्र को घेर लिया और स्थिति को संभाला. सोसायटी के निवासी इस घटना से बेहद सदमे में हैं.
मृतक की पहचान और पृष्ठभूमि
मृतक युवक की पहचान बिहार की राजधानी पटना के रहने वाला शत्रुघ्न सिन्हा के रूप में हुई है. वह पिछले कुछ समय से वह अपनी पत्नी के साथ ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रह रहा था. स्थानीय लोगों के अनुसार, युवक शांत स्वभाव का था, लेकिन हाल के दिनों में वह काफी परेशान नजर आ रहा था. उसकी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही थी.
घरेलू विवाद और बेरोजगारी
परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, शत्रुघ्न सिन्हा का अपनी पत्नी के साथ अक्सर घरेलू विवाद होता रहता था. इसके साथ ही वह कई दिनों से बेरोजगार था. नौकरी न मिलने के कारण उस पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा था. बताया जा रहा है कि यही कारण उसके मानसिक तनाव की बड़ी वजह बने. तनाव के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया.
पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस के मुताबिक मामले की जांच की जा रही और परिजनों से पूछताछ की जा रही है और सोसायटी के लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं. फिलहाल आत्महत्या के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी.
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर मानसिक तनाव, बेरोजगारी और पारिवारिक समस्याओं की गंभीरता को उजागर करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते संवाद और मानसिक सहयोग बेहद जरूरी है. समाज और परिवार को चाहिए कि तनाव में चल रहे लोगों की भावनाओं को समझें और उन्हें अकेला न छोड़ें. एक छोटी पहल कई जिंदगियां बचा सकती है.
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