कोटा में दर्दनाक हादसा, वीडियो में देखें कैसे अंडरपास निर्माण के दौरान जमीन धंसने से दो रेलवे इंजीनियरों की हुई मौत
राजस्थान के कोटा में दरा वैली के पास रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से दो रेलवे इंजीनियर, प्रभात सिंह झा और पंकज कुमार झा, मलबे में दब गए. चलिए जानते हैं कैसे हुआ ये हादसा.
कोटा: गुरुवार रात राजस्थान में कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे 52 पर दारा घाटी के पास एक रेलवे अंडरपास के निर्माण के दौरान दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें रेत का एक बड़ा हिस्सा धंसने से दो रेलवे इंजीनियर उसके नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई.
यह हादसा रात करीब 8 बजे हुआ, जब निर्माण स्थल पर बॉक्स पुशिंग से जुड़ा काम चल रहा था. अधिकारियों के मुताबिक आसपास की जमीन अचानक धंस गई, जिससे दोनों इंजीनियर मलबे के नीचे दब गए.
सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर ने क्या बताया?
सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर सौरभ जैन ने बताया कि बचाव टीमों ने तुरंत इंजीनियरों को धंसी हुई जगह से बाहर निकालने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया. रेलवे अधिकारी और कोटा नगर निगम के अग्निशमन विभाग की टीमें भी तुरंत मौके पर पहुंचीं और बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिया.
कैसे हुई मृतकों की पहचान?
मृतकों की पहचान पंकज कुमार झा और इंजीनियर प्रभात सिंह झा के रूप में हुई. दोनों को LNT और JCB मशीनों की मदद से करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया और कोटा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
डॉक्टरों ने प्रभात सिंह झा को अस्पताल पहुंचने पर ही मृत घोषित कर दिया, जबकि पंकज कुमार झा को बचाने की तमाम कोशिशों के बावजूद कुछ ही देर बाद चोटों के कारण उनकी भी मौत हो गई. डॉक्टर राकेश जिंदल ने बताया कि मेडिकल टीम ने दोनों इंजीनियरों को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन वे बच नहीं पाए.
कानवास के SDM ने क्या कहा?
कानवास के SDM बाबूलाल मीणा ने बताया कि जब यह हादसा हुआ, तब तक मज़दूर काम खत्म करके वहां से जा चुके थे. मौके पर सिर्फ दोनों इंजीनियर ही निरीक्षण के लिए मौजूद थे. अधिकारियों के मुताबिक वे चल रहे निर्माण कार्य का जायजा ले रहे थे, तभी अचानक उनके ऊपर जमीन धंस गई. हादसे की सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर ही पुलिस मौके पर पहुंच गई.
कैसे हुआ हादसा?
यह अंडरपास कोटा के पास दारा घाटी इलाके में बार-बार लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए बनाया जा रहा था. अधिकारियों ने बताया कि इस रास्ते पर हर दिन बड़े वाहनों की भारी आवाजाही रहती है, जबकि इलाके में अभी सिर्फ़ एक ही पुल मौजूद है, जिससे अक्सर भारी ट्रैफिक जाम लग जाता है. निर्माण का ज्यादातर काम पहले ही पूरा हो चुका था और जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय कंक्रीट स्लैब डालने का काम चल रहा था.
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