IPL 2026 US Israel Iran War

91 लाख की बरामदगी से खुला लॉरेंस बिश्नोई गैंग का राज, राजस्थान-पंजाब में फैला वसूली नेटवर्क बेनकाब

पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क राजस्थान से लेकर पंजाब तक फैला हुआ था और लंबे समय से कारोबारियों से वसूली कर रहा था.

pinterest
Sagar Bhardwaj

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 91 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. इस बरामदगी के साथ ही लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक बड़े रंगदारी नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क राजस्थान से लेकर पंजाब तक फैला हुआ था और लंबे समय से कारोबारियों से वसूली कर रहा था.

कार रोकी तो खुल गई पूरी कहानी

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि भारी मात्रा में नकदी एक कार से ले जाई जा रही है. इसके आधार पर 29 दिसंबर की रात श्रीविजयनगर रोड पर एक कार को रोका गया. तलाशी के दौरान कार से तीन बैग मिले, जिनमें कुल 91 लाख रुपये नकद थे. कार में सवार लोग इतनी बड़ी रकम ले जाने का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए.

चार आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने कुलदीप कुमार (50), अमन कुमार (20), रामस्वरूप (38) और मनीष बिश्नोई को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि दो और आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है. पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर और बीकानेर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जांच में शामिल हो गए.

पैसे की कड़ी लॉरेंस गैंग तक

एसपी अमृता दुहान के अनुसार, यह पहली बार है जब राजस्थान पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गैंग तक सीधे पैसे की कड़ी जोड़ने में सफल हुई है. पूछताछ में पता चला कि यह रकम जोधपुर से होते हुए श्रीगंगानगर और फिर पंजाब भेजी जा रही थी. आरोपी केवल ले जाने का काम कर रहे थे.

विदेश से भी चल रहा था नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, गैंग के कुछ सदस्य विदेश से भी ऑपरेट कर रहे थे. कारोबारी लोगों को धमकाकर करोड़ों रुपये की वसूली की जाती थी. इस पैसे को ट्रांसफर करने के लिए USDT क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे बाद में नकद में बदला जाता था.

म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि कई लोगों के नाम पर बिना जानकारी के बैंक खाते खुलवाए गए, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है. इन्हीं खातों के जरिए क्रिप्टो लेनदेन किया गया.

जांच अभी जारी

पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां और बरामदगी हो सकती हैं. आयकर विभाग समेत अन्य एजेंसियां भी इस जांच में शामिल हो सकती हैं. इस कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है.