राजस्थान में बड़ा फर्जीवाड़ा, नकली दिव्यांग प्रमाण पत्र से 45 लोगों ने हासिल की सरकारी नौकरी
राजस्थान में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में अब तक 45 सरकारी कर्मचारियों की जांच पूरी हो चुकी है.
जयपुर: राजस्थान में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है. अब तक 45 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई सामने आ चुकी है. इनमें 25 कर्मचारियों को निलंबित करने के साथ गिरफ्तार किया गया है, जबकि 20 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज किए गए हैं.
यह मामला पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने से जुड़ा है. जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए कई लोगों ने गलत तरीके से दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाए. फिलहाल करीब 500 सरकारी कर्मचारी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं.
क्या लिया गया एक्शन?
इस मामले में ग्रामीण विकास विभाग में विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत शेरसिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया. जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल परिसर स्थित पुलिस थाने के थाना अधिकारी सूरजमल के अनुसार सूचना के आधार पर विकास अधिकारी के दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जांच की गई थी. जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया, जिसके बाद कार्रवाई की गई.
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ऐसे कितने मामले आए सामने?
फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने और इनके जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में पुलिस और जांच एजेंसियां प्रमाण पत्र जारी करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं. इस मामले में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत करीब आधा दर्जन चिकित्सकों के खिलाफ भी अलग अलग मामले दर्ज किए गए हैं.
जांच के दौरान क्या आया सामने?
जांच के दौरान आरोप है कि कुछ चिकित्सकों ने पैसे लेकर लोगों को गलत दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए. इनमें किसी को श्रवण बाधित तो किसी को दृष्टिबाधित होने का प्रमाण पत्र दिए जाने की बात सामने आई है. इन प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी में आरक्षण और अन्य लाभ हासिल किए जाने की आशंका है.
क्या है जांच का उद्देश्य?
विशेष जांच दल यानी एसओजी पिछले करीब तीन महीने से इस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच का उद्देश्य फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वाले कर्मचारियों के साथ साथ इस नेटवर्क में शामिल बिचौलियों और प्रमाण पत्र जारी करने वाले लोगों की भूमिका का पता लगाना है.
कौन लोग शामिल थे इसमें शामिल?
जांच का दायरा करीब 500 सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचने के कारण आने वाले दिनों में और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. अधिकारियों की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों ने नौकरी हासिल करने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कौन कौन लोग शामिल थे.
मामले में पुलिस की कार्रवाई के साथ विभागीय स्तर पर भी जांच जारी है. दोष साबित होने पर संबंधित कर्मचारियों और फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने या जारी करने में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है.