राजस्थान पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़, 10 बच्चों को बचाया गया

राजस्थान के झालावाड़ में पुलिस ने अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के दौरान दस बच्चियों को मुक्त कराया गया.

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Sagar Bhardwaj

राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है जिसने मानव तस्करी के एक खौफनाक नेटवर्क का खुलासा कर दिया. कई राज्यों तक फैले इस गिरोह पर नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त और उन्हें वेश्यावृत्ति के लिए भेजने के आरोप हैं. पुलिस की छापेमारी में दस बच्चियों को सुरक्षित निकाला गया जबकि पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जांच से पता चला है कि यह गिरोह वर्षों से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपना निशाना बनाकर अपराध को अंजाम दे रहा था.

गरीब परिवारों को बनाता था निशाना

जांच में सामने आया कि गिरोह मुख्य रूप से आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों को तलाशता था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवारों को उनकी बेटियों के लिए बेहतर भविष्य, नौकरी और आर्थिक मदद का लालच दिया जाता था. कई मामलों में परिवारों के साथ लिखित समझौते भी किए गए थे. इन दस्तावेजों में ऐसे प्रावधान रखे जाते थे जिनसे परिवार गिरोह के प्रभाव में बने रहें. पुलिस का कहना है कि कर्ज और मजबूरी का फायदा उठाकर बच्चियों को बेहद कम उम्र में परिवारों से अलग कर दिया जाता था. यही वजह है कि यह मामला केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक शोषण का भी गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है.

कम उम्र में छीन लिया बचपन

पुलिस जांच के अनुसार, बच्चियों को कई वर्षों तक गिरोह के नियंत्रण में रखा जाता था. जब उनकी उम्र बढ़ने लगती थी तब उन्हें अलग-अलग शहरों में भेजने की तैयारी की जाती थी. अधिकारियों का दावा है कि कुछ लड़कियों को मुंबई समेत विभिन्न स्थानों पर वेश्यावृत्ति के लिए बेचा जाता था. बचाई गई अधिकांश बच्चियों की उम्र चार से पांच वर्ष के बीच बताई गई है. यह तथ्य जांच अधिकारियों को भी हैरान कर रहा है. पुलिस का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में बच्चों को परिवार से दूर रखना उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर गंभीर असर डाल सकता है.

विशेष टीम ने खोली परतें

तस्करी की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन किया. इसके साथ तीन अतिरिक्त टीमों को भी लगाया गया ताकि नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जा सके. जांच के दौरान पुलिस को फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल के संकेत मिले. आरोप है कि इन दस्तावेजों के जरिए नाबालिग लड़कियों को बालिग दिखाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस ने विभिन्न जिलों में छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं. अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें कई बिचौलिए सक्रिय थे.

पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है. जांच में एक महिला को गिरोह का मुख्य संचालक बताया गया है, जो कथित तौर पर अलग-अलग राज्यों के बिचौलियों के संपर्क में थी. पुलिस ने बताया कि तीन अन्य संदिग्ध अभी फरार हैं और उनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है. गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अनैतिक तस्करी रोकथाम कानून समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. अदालत में पेश किए जाने के बाद आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. वहीं, बचाई गई बच्चियों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए संबंधित विभागों को भी सक्रिय किया गया है.