देशभर में हर साल लाखों युवा UPSC और अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं. उनका सपना एक जिम्मेदार अधिकारी बनकर देश की सेवा करना होता है. लेकिन सरकारी सेवा में चयन के बाद असली चुनौती कठिन परिस्थितियों में कानून, ईमानदारी और कर्तव्य के बीच सही फैसला लेने की होती है.
पंजाब की ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शोरी की कहानी इसी जिम्मेदारी और नैतिकता की मिसाल है. उनका जीवन बताता है कि एक सरकारी अधिकारी की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके फैसलों और कर्तव्यनिष्ठा से होती है. यही वजह है कि उनकी कहानी आज भी लाखों UPSC अभ्यर्थियों और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी सीख मानी जाती है.
नेहा शोरी पंजाब में ड्रग इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत थीं. बाद में उन्हें मोहाली के पास खरड़ स्थित सरकारी ड्रग लैबोरेटरी में जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी की जिम्मेदारी सौंपी गई. उनका कार्य दवाओं की बिक्री पर निगरानी रखना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना था. विभाग में उन्हें एक जिम्मेदार और नियमों के प्रति प्रतिबद्ध अधिकारी माना जाता था.
साल 2009 में रोपड़ में तैनाती के दौरान नेहा शोरी ने एक मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया. जांच के दौरान कुछ दवाओं से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके. नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्होंने दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया. उस समय यह एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय था, जिसे उन्होंने अपने अधिकार और जिम्मेदारी के तहत लागू किया.
29 मार्च 2019 को लाइसेंस रद्द होने के करीब दस वर्ष बाद संबंधित व्यक्ति ने खरड़ स्थित कार्यालय में पहुंचकर नेहा शोरी पर गोली चला दी. गंभीर रूप से घायल नेहा शोरी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई. पुलिस के अनुसार घटना के बाद आरोपी ने खुद को भी गोली मार ली. इस वारदात ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया.
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी लंबे समय से लाइसेंस रद्द होने से नाराज था. जांच एजेंसियों ने बताया कि नेहा शोरी उस मामले में अदालत में गवाही देने वाली थीं. बाद में विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका नहीं पाई. हालांकि, नेहा शोरी के परिवार ने जांच पर सवाल उठाए और स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर अदालत का रुख किया.
नेहा शोरी की कहानी यह बताती है कि सरकारी सेवा केवल सम्मान और पद नहीं, बल्कि कानून के प्रति निष्ठा और कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्ष निर्णय लेने की जिम्मेदारी है. प्रतियोगी परीक्षा पास करना सफलता की शुरुआत हो सकती है, लेकिन हर परिस्थिति में ईमानदारी बनाए रखना ही एक अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान बनता है. यही संदेश आज भी लाखों UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों को प्रेरित करता है. यहां दी गई तमाम जानकारी अलग-अलग मीडियो रिपोर्ट से ली गई हैं.