सिख कैदियों की रिहाई को लेकर जोरदार प्रदर्शन, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस; 21 अगस्त को पंजाब बंद का ऐलान
चंडीगढ़ में सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल आवास की ओर मार्च की कोशिश की. पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों से भीड़ हटाई.
चंडीगढ़: चंडीगढ़ में शनिवार को सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया. कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की. चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पुलिस ने पहले से सुरक्षा घेरा तैयार कर रखा था. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई. पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.
प्रदर्शनकारियों को लोक भवन तक पहुंचने से रोकने के लिए चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई थी. बैरिकेड पर कांटेदार तार भी लगाए गए थे. मौके पर दंगा रोधी वाहन, रैपिड एक्शन फोर्स और अन्य सुरक्षाबलों की तैनाती की गई. प्रदर्शनकारियों ने कुछ जगहों पर बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश की. कुछ लोगों ने ट्रैक्टर की मदद से अवरोध हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की.
पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारें कीं
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान स्थिति बिगड़ी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पानी की बौछार की गई. चंडीगढ़ और मोहाली के बीच कई बॉर्डर प्वाइंट पहले ही सील कर दिए गए थे. मोर्चा ने यह मार्च उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर बुलाया था, जिनके बारे में उसका दावा है कि वे सजा पूरी करने के बाद भी जेलों में बंद हैं.
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किन कैदियों की रिहाई की मांग
कौमी इंसाफ मोर्चा जिन कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है, उनमें जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआणा, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भेओरा, देविंदरपाल सिंह भुल्लर, गुरदीप सिंह खेहरा, लखविंदर सिंह लखा, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह शामिल हैं. हवारा और राजोआणा पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हैं. भुल्लर 1993 के दिल्ली बम धमाका मामले में सजा काट रहे हैं.
क्या हैं ‘बंदी सिंह’?
‘बंदी सिंह’ शब्द का इस्तेमाल उन सिख कैदियों के लिए किया जाता है, जिन्हें 1990 के दशक के दौरान पंजाब में उग्रवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था. कौमी इंसाफ मोर्चा 7 जनवरी 2023 से चंडीगढ़ के सेक्टर 52-53 और मोहाली के YPS चौक के पास धरना दे रहा है. कई सिख और राजनीतिक संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है. मोर्चा अब 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान कर चुका है.