अमृतसर से पाकिस्तान रवाना हुए 290 श्रद्धालु, जानें क्यों सिखों के लिए बेहद खास है यह यात्रा
महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर 290 सिख श्रद्धालुओं का जत्था अमृतसर से पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ. श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे और 30 जून को वापस भारत लौटेंगे.
महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक सिख गुरुधामों के दर्शन के लिए सिख श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था अमृतसर से रवाना हो गया है. श्रद्धालुओं के इस जत्थे को श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्यालय से विदा किया गया. यह धार्मिक यात्रा सिख समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होने की इच्छा रखते हैं. एसजीपीसी के अनुसार श्रद्धालुओं का यह जत्था पाकिस्तान में स्थित विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेगा. यात्रा के दौरान श्रद्धालु कई पवित्र स्थलों पर माथा टेकेंगे और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह जत्था 30 जून को भारत वापस लौटेगा.
एसजीपीसी ने किए सभी आवश्यक प्रबंध
यात्रा के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने संभाली है. जत्थे की अगुवाई समिति सदस्य बाबा बूटा सिंह कर रहे हैं. उनके साथ डिप्टी लीडर के रूप में खुशविंदर सिंह भाटिया और बीबी हरजिंदर कौर शामिल हैं. वहीं प्रशासनिक प्रबंधन की जिम्मेदारी उप सचिव आजाददीप सिंह को सौंपी गई है.
श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मनन ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन करना हर सिख श्रद्धालु की बड़ी इच्छा होती है. यही कारण है कि इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि समिति की ओर से यात्रा को सफल और सुचारू बनाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं.
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302 में से 290 श्रद्धालुओं को मिला वीजा
इस बार यात्रा के लिए कुल 302 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट वीजा प्रक्रिया के लिए भेजे गए थे. हालांकि इनमें से 12 आवेदकों को वीजा जारी नहीं किया गया. इसके बाद 290 श्रद्धालुओं को वीजा प्राप्त हुए और उन्हें यात्रा के लिए पासपोर्ट सौंप दिए गए. महाराजा रणजीत सिंह सिख इतिहास के सबसे महान शासकों में गिने जाते हैं. उनकी बरसी के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस यात्रा के माध्यम से श्रद्धालु सिख विरासत और इतिहास से जुड़े पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकेंगे. यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने का माध्यम मानी जाती है.