बेअदबी मामलों की जांच में बदलेगी पुलिस की भाषा, अब 52 सम्मानजनक शब्दों का होगा अनिवार्य इस्तेमाल
पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने बेअदबी मामलों की जांच को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए 52 श्रद्धासूचक शब्दों की सूची जारी की है. अब पुलिस अधिकारियों को जांच और दस्तावेजों में इन्हीं निर्धारित शब्दों का प्रयोग करना होगा.
पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े बेअदबी मामलों की जांच प्रक्रिया को धार्मिक मर्यादा और संवेदनशीलता के अनुरूप बनाने के लिए पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (पीबीआई) ने नई पहल की है. इसके तहत सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला पुलिस प्रमुखों को 52 सम्मानजनक धार्मिक शब्दों की सूची भेजी गई है. निर्देश दिए गए हैं कि जांच से जुड़े हर दस्तावेज और कार्रवाई में केवल इन्हीं निर्धारित शब्दों का प्रयोग किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की धार्मिक भावना आहत न हो.
जांच के हर चरण में रहेगा भाषा पर विशेष ध्यान
पीबीआई के निर्देशों के अनुसार, बेअदबी से जुड़े मामलों की एफआईआर, केस डायरी, जांच रिपोर्ट और अन्य आधिकारिक दस्तावेज तैयार करते समय अधिकारियों को निर्धारित शब्दावली का ही उपयोग करना होगा. घटनास्थल का निरीक्षण, साक्ष्यों की जब्ती और दस्तावेजीकरण सहित जांच के प्रत्येक चरण में धार्मिक गरिमा का पूरा ध्यान रखने को कहा गया है. विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रक्रिया कानून के साथ-साथ धार्मिक संवेदनशीलता का भी सम्मान करे और भाषा को लेकर किसी तरह का विवाद उत्पन्न न हो.
52 श्रद्धासूचक शब्दों की विस्तृत सूची जारी
नई सूची में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप, बीड़ साहिब, पावन अंग, गुटका साहिब, पंज प्यारे, गुरुद्वारा साहिब, पालकी साहिब, रुमाला साहिब, चौर साहिब, ग्रंथी सिंह, पाठी सिंह, सेवा, अखंड पाठ, सहज पाठ, अरदास, अमृत वेला, कीर्तन, संगत, लंगर, दस्तार, गतका, चढ़दी कला, शहादत और सेवा यूनिक पहचान नंबर सहित कुल 52 सम्मानजनक धार्मिक शब्द शामिल किए गए हैं. अधिकारियों को इन्हीं शब्दों का प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं.
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पहले 22 शब्द थे, अब सूची का हुआ विस्तार
पीबीआई ने 16 जून 2026 को पहले 22 शब्दों की प्रारंभिक सूची जारी की थी. बाद में धार्मिक शब्दावली को और व्यापक बनाते हुए इसे बढ़ाकर 52 शब्द कर दिया गया. संशोधित सूची के साथ नया आधिकारिक पत्र भी जारी किया गया है, ताकि राज्यभर में सभी अधिकारी एक समान शब्दावली अपनाएं. बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस रिकॉर्ड में प्रयुक्त कुछ सामान्य और तकनीकी शब्दों पर धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी. इसके बाद भाषा को अधिक सम्मानजनक बनाने की मांग सामने आई, जिसे ध्यान में रखते हुए यह नया कदम उठाया गया है.