पठानकोट में SHG को बड़ी सौगात, मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने सौंपी ई-कार्ट की चाबियां
पठानकोट में पंजाब राज्य आजीविका मिशन के तहत सेल्फ हेल्प ग्रुपों को 10 ब्याज मुक्त ई-रिक्शे दिए जा रहे हैं. योजना से लाभार्थियों को रोजगार और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
चंडीगढ़: पंजाब राज्य आजीविका मिशन के तहत पठानकोट जिले में सेल्फ हेल्प ग्रुपों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल शुरू की गई है. इसके तहत विभिन्न ब्लॉकों से जुड़े समूहों को ब्याज मुक्त ई-रिक्शे यानी ई-कार्ट उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को अपना काम शुरू करने का साधन उपलब्ध करवाना और उनकी नियमित आय बढ़ाना है.
एडीसी डेवलपमेंट कार्यालय, पठानकोट में ई-रिक्शों के वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई. कैबिनेट मंत्री पंजाब लाल चंद ने बताया कि जिले के नरोट जैमल सिंह, घरोटा, सुजानपुर, धार और पठानकोट ब्लॉकों से संबंधित सेल्फ हेल्प ग्रुपों को कुल 10 ई-रिक्शे दिए जा रहे हैं. इनमें खुशीनगर, हैबो, ताजपुर और सतवाल सहित कई गांवों के समूह शामिल हैं.
पांच ई-रिक्शे आज, बाकी सोमवार को
कुल 10 ई-रिक्शों में से पांच का वितरण शुरू कर दिया गया है. शेष पांच ई-रिक्शे सोमवार को लाभार्थियों को उपलब्ध करवाए जाएंगे. प्रत्येक ई-रिक्शे की कीमत करीब 1 लाख 62 हजार रुपये बताई गई है. इस हिसाब से सभी 10 ई-रिक्शों की कुल कीमत लगभग 16 लाख रुपये है.
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दो साल तक नहीं देनी होगी किस्त
इस योजना की खास बात यह है कि लाभार्थियों को ई-रिक्शे ब्याज मुक्त आधार पर दिए जा रहे हैं. योजना के तहत पहले दो साल तक लाभार्थियों को किसी तरह की किस्त नहीं चुकानी होगी. दो साल की अवधि पूरी होने के बाद किस्तों का भुगतान शुरू होगा. खास बात यह है कि इन किस्तों पर किसी भी तरह का ब्याज नहीं लिया जाएगा.
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
इस पहल से सेल्फ हेल्प ग्रुपों से जुड़ी महिलाओं और अन्य लाभार्थियों को रोजगार शुरू करने का अवसर मिलेगा. ई-रिक्शे की मदद से वे परिवहन और अन्य आय आधारित गतिविधियों से जुड़ सकते हैं. सरकार की इस पहल का मकसद केवल साधन उपलब्ध करवाना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाकर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी है.
आय बढ़ाने में मिल सकती है मदद
ब्याज मुक्त सुविधा होने के कारण लाभार्थियों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम रहेगा. पहले दो साल तक किस्त नहीं होने से उन्हें अपने काम को स्थापित करने और आमदनी बढ़ाने के लिए समय मिलेगा. पठानकोट में शुरू की गई यह पहल सेल्फ हेल्प ग्रुपों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.