पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व पर खींचतान, हाईकमान की बैठकों से बढ़ी सियासी हलचल

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद गहराता जा रहा है. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की राय अलग-अलग बताई जा रही है, जबकि राजा वड़िंग और चरणजीत चन्नी के समर्थक अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने में जुटे हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. पार्टी के भीतर जारी खींचतान अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है. सूत्रों के मुताबिक पंजाब कांग्रेस के विवाद पर राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच अलग-अलग सोच सामने आई है. इस बीच प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल लगातार संगठन की स्थिति पर रिपोर्ट दे रहे हैं. वहीं चन्नी और राजा वड़िंग के समर्थक भी अपनी-अपनी ताकत दिखाने में लगे हैं.

सूत्रों के अनुसार पंजाब कांग्रेस की स्थिति पर लगातार मंथन चल रहा है. केसी वेणुगोपाल से चर्चा के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी भूपेश बघेल से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से जानकारी ली. हालांकि पार्टी की ओर से अब तक किसी संभावित बदलाव या फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

राजा वड़िंग और चन्नी के बीच खींचतान

पार्टी के भीतर राजा वड़िंग और चरणजीत चन्नी के समर्थकों के बीच अलग-अलग राय बनी हुई है. चन्नी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है. दूसरी ओर भूपेश बघेल साफ कह चुके हैं कि फिलहाल प्रदेश नेतृत्व में किसी बदलाव की संभावना नहीं है और संगठन से जुड़े सभी पक्षों की राय हाईकमान तक पहुंचा दी गई है.


हाईकमान क्यों नहीं बदलना चाहता नेतृत्व

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक 2022 विधानसभा चुनाव में हार के बाद कठिन दौर में राजा वड़िंग ने संगठन की जिम्मेदारी संभाली. ऐसे में पार्टी नेतृत्व यह संदेश नहीं देना चाहता कि मुश्किल समय में काम करने वाले नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है. यही वजह मानी जा रही है कि फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति नहीं बन सकी है.

चन्नी खेमा बढ़ा रहा दबाव

चरणजीत चन्नी का खेमा राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखना चाहता है. समर्थकों का मानना है कि उन्हें अपनी बात सीधे शीर्ष नेतृत्व के सामने रखने का अवसर मिलना चाहिए. इसी उद्देश्य से वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से बैठक तय कराने की कोशिशें भी जारी हैं.

आगे के फैसले पर सबकी नजर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस का यह विवाद आने वाले दिनों में पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है. फिलहाल अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के हाथ में है. सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संगठनात्मक एकता बनाए रखने के लिए नेतृत्व कौन सा रास्ता चुनता है.