'शानदार मुलाकात' से जंतर-मंतर तक, कैसे बिगड़े मोदी सरकार और सोनम वांगचुक के रिश्ते?

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 18वें दिन भी जारी रहा. उनकी सेहत स्थिर बताई गई है, लेकिन स्वास्थ्य मानकों में गिरावट दर्ज हुई है. वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सरकार से संवाद की मांग पर अड़े हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन लगातार 18वें दिन भी जारी है. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों का कहना है कि उनकी सेहत फिलहाल स्थिर है, हालांकि कुछ स्वास्थ्य संकेतकों में गिरावट देखी गई है. वांगचुक सरकार के साथ बातचीत शुरू करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं. इस बीच उनके आंदोलन ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

आंदोलन से जुड़े अभिजीत दिपके ने बताया कि कई लोग वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं. इसके जवाब में वांगचुक का कहना है कि सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि वह बातचीत शुरू करने से क्यों बच रही है. आंदोलनकारी इसे पूरे विवाद का सबसे अहम मुद्दा मान रहे हैं.

कभी रहे थे सरकार के करीबी

मार्च 2023 में सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी. उस समय दोनों पक्षों ने शिक्षा के क्षेत्र में नए विचारों पर सकारात्मक चर्चा की थी. बाद के वर्षों में दोनों के संबंधों में दूरी बढ़ती गई और लद्दाख से जुड़े मुद्दों के बाद विवाद खुलकर सामने आने लगा.


लद्दाख आंदोलन से बढ़ा विवाद

वांगचुक ने लद्दाख को अधिक अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग का समर्थन किया. बाद में उनके संस्थान की जमीन की लीज रद्द होने और आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी जैसे घटनाक्रम भी सामने आए. मार्च 2026 में जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने फिर बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जताई थी.

सरकार और आंदोलन आमने-सामने

हाल के दिनों में केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए नए प्रशासनिक ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर कुछ घोषणाएं की हैं. हालांकि वांगचुक ने इन नए प्रस्तावों पर अभी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. दूसरी ओर उनका अनशन पहले की तरह जारी है और समर्थक लगातार उनके साथ बने हुए हैं.

राजनीतिक और सामाजिक समर्थन जारी

जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को कई जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन मिला है. कुछ विपक्षी नेताओं ने भी वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई है. वहीं 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन आंदोलनकारी संसद मार्च की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं.