'लिवर गुरु' की मिसाल', 550 से ज्यादा ट्रांसप्लांट कर बचाईं जिंदगियां; पंजाब के इस डॉक्टर ने रचा नया इतिहास
पंजाब के आनंदपुर साहिब के रहने वाले देश के युवा लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. गुरसागर सिंह सहोता ने अब तक 550 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट कर मरीजों को नई जिंदगी दी है.
पंजाब के आनंदपुर साहिब से निकलकर देश के सबसे युवा लिवर ट्रांसप्लांट सर्जनों में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. गुरसागर सिंह सहोता आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. अपनी सर्जिकल विशेषज्ञता और सेवा भावना के दम पर उन्होंने अब तक 550 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए हैं. उनकी इसी उपलब्धि के कारण लोग उन्हें प्यार से 'लिवर गुरु' के नाम से जानते हैं.
डॉ. सहोता सिर्फ जटिल ऑपरेशन करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने का भी लगातार प्रयास कर रहे हैं. उनका मानना है कि अंगदान के जरिए कई लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है. यही वजह है कि चिकित्सा सेवा के साथ-साथ वह सामाजिक जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं.
सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफलता का सफर
डॉ. गुरसागर सिंह सहोता की शुरुआती पढ़ाई नंगल मॉडल सरकारी स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने लुधियाना के डीएमसी अस्पताल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. आगे सर्जरी की विशेषज्ञता हासिल करने के लिए उन्होंने लखनऊ के केजीएमसी में अध्ययन किया. बाद में उन्होंने एम्स की कठिन प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर गोल्ड मेडल जीता और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी में उच्च प्रशिक्षण प्राप्त किया.
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पंजाब को मिला आत्मनिर्भर लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर
भोपाल के एक निजी अस्पताल में करीब साढ़े तीन वर्ष सेवाएं देने के बाद डॉ. सहोता वर्ष 2024 में लुधियाना के डीएमसी अस्पताल लौटे. यहां उन्होंने पंजाब का पहला ऐसा लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया, जिसमें किसी बाहरी विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत नहीं पड़ी. इस उपलब्धि ने राज्य के चिकित्सा ढांचे को नई मजबूती दी और मरीजों को राज्य के भीतर ही उन्नत इलाज मिलने का रास्ता आसान बनाया.
3 साल के बच्चे से 69 वर्षीय मरीज तक बचाई जान
डॉ. सहोता ने अपने करियर में कई चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट किए हैं. वर्ष 2023 में उन्होंने जन्मजात गंभीर लिवर बीमारी से जूझ रहे तीन साल के बच्चे का सफल ट्रांसप्लांट किया. इस ऑपरेशन में बच्चे के पिता ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया. इसके अलावा उन्होंने 69 वर्ष के बुजुर्ग मरीज का भी सफल लिवर ट्रांसप्लांट कर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता साबित की.
अंगदान को लेकर चला रहे जागरूकता अभियान
डॉ. सहोता वर्ष 2021 से सोशल मीडिया और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को लिवर संबंधी बीमारियों और अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक कर रहे हैं. 'अजूनी लाइफ लाइन वेलफेयर सोसाइटी' के माध्यम से वह लोगों को समझाते हैं कि अंगदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है. उनका उद्देश्य समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना है.
परिवार का साथ और सेवा का संकल्प
डॉ. सहोता की इस सफलता में उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनकी पत्नी पेशे से रिसर्च फार्मासिस्ट हैं और हर कदम पर उनका सहयोग करती हैं. उनका एक बेटा भी है. आधुनिक चिकित्सा तकनीक, समर्पण और समाज सेवा की भावना के साथ डॉ. गुरसागर सिंह सहोता लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं और पंजाब सहित पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं.