सीएम भगवंत मान ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठाई आवाज, SIR पर इलेक्शन कमीशन से मांगा जवाब
आज देश में चुनावों को लेकर एक अजीब-सी बेचैनी फैली हुई है. लोग सवाल पूछ रहे हैं, चर्चा कर रहे हैं और अपने मन का संदेह खुलकर व्यक्त कर रहे हैं. यह कोई छोटी बात नहीं है, जब जनता, जो लोकतंत्र की असली मालिक है.
चंडीगढ़: देश में इन दिनों चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर जिस तरह का अविश्वास और बेचैनी का माहौल बना हुआ है, उसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक ऐसा बयान दिया है जो सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक हर जगह वायरल हो रहा है.
सीएम मान ने देश में चल रहे एसआईआर को लेकर बयान दिया है और इसमें चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. उनका कहना है कि भारतीय नागरिकों को जवाब देना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है.
सवाल पूछना जनता का हक, जवाब देना संस्था का फर्ज
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ शब्दों में कहा, “लोग अगर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं तो इसमें गलत क्या है? सबूत जनता क्यों दे? जवाब तो चुनाव आयोग को देना चाहिए.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनावी व्यवस्था को लोगों को भरोसा देना चाहिए, डर नहीं.
देशव्यापी गूंजता संदेश
भगवंत मान का यह बयान सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रहा. सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने इसे शेयर किया और इसे “जनता की आवाज” बताया. कई यूजर्स ने लिखा कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री बिना लाग-लपेट के जनता के मन की बात कह रहा है.
पारदर्शिता ही एकमात्र रास्ता
सीएम मान ने कहा कि जब करोड़ों लोग अपने वोट की ताकत पर सवाल उठा रहे हों तो चुप रहना या सवाल करने वालों को देशद्रोही बताना समाधान नहीं है. समाधान है पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और हर संदेह को दूर करना. उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि जनता के हर सवाल का सम्मान के साथ जवाब दिया जाए.
लोकतंत्र को मजबूत करने वाली आवाज
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समय में जब ज्यादातर नेता इस मुद्दे पर खामोश हैं या बचाव की मुद्रा में हैं, भगवंत मान ने साहस दिखाते हुए सीधे जनता के साथ खड़े होने का फैसला किया. यह बयान न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश के उन नागरिकों को राहत दे रहा है जो अपने वोट को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं.
जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी
भगवंत मान ने अंत में कहा, “लोकतंत्र जनता के भरोसे पर चलता है. अगर जनता का भरोसा डगमगाया तो कोई भी व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं टिक सकती.” उनका यह बयान इस बात का सबूत है कि अभी भी हमारे देश में ऐसे नेता मौजूद हैं जो कुर्सी की नहीं, जनता की आवाज को तरजीह देते हैं.
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