'अकाल तख्त में पेश होंगे AAP के मंत्री और विधायक...', केजरीवाल के साथ हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम भगवंत मान ने कही बड़ी बात

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त की सर्वोच्चता का सम्मान करने की बात कही, जबकि अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर में लवकुश और माता जानकी मंदिर बनाने की घोषणा की.

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Km Jaya

अमृतसर: पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के सिख मंत्री और विधायक सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होकर जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 पर अपना पक्ष रखेंगे. इस दौरान कुलतार सिंह संधवां भी उनके साथ मौजूद रहेंगे. यह मामला राज्य सरकार द्वारा पारित कानून और उस पर जताई गई धार्मिक आपत्तियों को लेकर चर्चा में है.

अमृतसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगवंत मान ने कहा कि अकाल तख्त की ओर से जिन विधायकों और मंत्रियों को बुलाया गया है, वे सभी वहां पहुंचेंगे और अपना लिखित जवाब सौंपेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अकाल तख्त की सर्वोच्चता का सम्मान करती है. मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब नहीं किया गया है, लेकिन पहले भी वह राष्ट्रपति का कार्यक्रम छोड़कर अकाल तख्त पहुंचे थे.


मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल मास्क वाले वीडियो को लेकर सरकार अपना पक्ष रखेगी. उनके अनुसार, यह वीडियो फर्जी है और इसे संबंधित पत्र के साथ अकाल तख्त को भेजा जाएगा. उन्होंने दोहराया कि वह उस वीडियो में मौजूद नहीं हैं और अकाल तख्त से आने वाले किसी भी निर्णय का सम्मान करेंगे.

अरविंद केजरीवाल ने क्या की घोषणा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि अमृतसर में लवकुश और माता जानकी के नाम पर एक भव्य मंदिर बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि अमृतसर सभी धर्मों के लोगों की आस्था का केंद्र है और मंदिर निर्माण की विस्तृत योजना बाद में साझा की जाएगी.

केजरीवाल ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जांच में केवल छोटे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़े आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने दावा किया कि मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

मंत्री और विधायक के तलब किए जाने की क्या है वजह?

दरअसल पांच सिंह साहिबान के अनुसार पंजाब सरकार ने जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को केंद्रीय सिख संस्थाओं से पर्याप्त सलाह-मशविरा किए बिना पारित किया. साथ ही अकाल तख्त की ओर से उठाई गई आपत्तियों को भी नजरअंदाज किया गया. इसी कारण पंजाब सरकार के सिख मंत्रियों और विभिन्न दलों के सिख विधायकों को 29 जून को अकाल तख्त सचिवालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया है.

यह पूरा मामला धार्मिक संस्थाओं और राज्य सरकार के बीच संवाद तथा कानून को लेकर उठे मतभेदों से जुड़ा है. अब सभी की नजर 29 जून को होने वाली पेशी और अकाल तख्त की आगामी प्रक्रिया पर बनी हुई है.