बदलने वाली है चंडीगढ़ की तस्वीर, 10 मंजिला इमारतों का रास्ता साफ! अगले हफ्ते होगा बड़ा फैसला
चंडीगढ़ मास्टर प्लान में प्रस्तावित बदलावों पर जल्द बड़ा फैसला हो सकता है. प्रशासन हाईराइज इमारतों, बढ़े हुए एफएआर और मिश्रित भूमि उपयोग के प्रस्ताव गृह मंत्रालय के सामने रखेगा, जिस पर बहस तेज है.
चंडीगढ़ के विकास मॉडल में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. अगले सप्ताह प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा करेंगे. बढ़ती आबादी और सीमित भूमि को देखते हुए प्रशासन ऊंचाई आधारित विकास का पक्ष रख रहा है. प्रस्तावों में भवनों की ऊंचाई बढ़ाने, एफएआर में वृद्धि और मिश्रित भूमि उपयोग का विस्तार शामिल है. हालांकि इन बदलावों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं.
प्रशासन का मानना है कि सीमित जमीन में अधिक लोगों को बसाने के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट जरूरी है. प्रस्ताव के अनुसार कुछ क्षेत्रों में एफएआर को 1.2 से बढ़ाकर 3.0 तक किया जा सकता है. इससे एक ही भूखंड पर अधिक निर्माण संभव होगा और 30 मीटर तक ऊंची इमारतों का मार्ग खुलेगा.
नए आवासीय क्षेत्रों की योजना
मलोया के पास प्रस्तावित पॉकेट-7 में उच्च घनत्व वाली आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी है. अनुमान है कि यहां करीब 45 हजार लोगों को बसाया जा सकेगा. वहीं मनीमाजरा के पॉकेट-6 में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिला भवनों की अनुमति देने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
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औद्योगिक और एमएलयू क्षेत्र में विस्तार
औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी नियमों में ढील का प्रस्ताव है. एफएआर बढ़ाने और भवन ऊंचाई में छूट से एमएसएमई क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. साथ ही मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्र को 252 एकड़ से बढ़ाकर 428 एकड़ तक करने की तैयारी है.
विरोध और चिंताएं
प्रस्तावित बदलावों का विरोध भी सामने आ रहा है. सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि इससे शहर की मूल अवधारणा प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों ने भी ट्रैफिक, पार्किंग, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाओं पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता व्यक्त की है.
अंतिम फैसला केंद्र के हाथ में
चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण मास्टर प्लान में किसी भी बड़े बदलाव पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है. ऐसे में अमित शाह के साथ होने वाली बैठक यह तय करेगी कि प्रस्ताव मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ेंगे या उनमें संशोधन किया जाएगा.