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राहुल गांधी को मिली 10 पुश-अप्स की सजा, जानें क्या करी थी ऐसी गलती

मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ के दौरान राहुल गांधी को देर से पहुंचने पर 10 पुश-अप्स की सज़ा मिली. क्योंकि पार्टी के ट्रेनिंग हेड सचिन राव ने ‘नो-डिले रूल’ लागू किया था.

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Sagar Bhardwaj

कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों बिहार चुनाव अभियान के बीच मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में पार्टी की ट्रेनिंग मीटिंग में शामिल हुए. लेकिन जब वे एक सत्र में थोड़ी देर से पहुंचे, तो उन्हें ‘10 पुश-अप्स’ करने की सज़ा दी गई. यह मज़ेदार घटना कांग्रेस के “संगठन सृजन अभियान” का हिस्सा थी, जिसका मकसद पार्टी कैडर को मज़बूत बनाना और युवा नेताओं को टीमवर्क का संदेश देना था. राहुल ने सज़ा को सहजता से स्वीकार कर सबका मन जीत लिया.

नो-डिले रूल के तहत राहुल को सज़ा

राहुल गांधी जिस सत्र में शामिल हुए, उसकी देखरेख ट्रेनिंग हेड सचिन राव कर रहे थे. जब राहुल थोड़ी देर से पहुंचे, तो राव ने मुस्कराते हुए कहा, “जो लेट आएगा, उसे सज़ा मिलेगी.” राहुल ने पूछा, “क्या सज़ा?” राव ने जवाब दिया, “कम से कम 10 पुश-अप्स.” राहुल ने बिना हिचक सफेद टी-शर्ट में मंच पर ही पुश-अप्स करना शुरू कर दिया, और बाकी जिला अध्यक्षों ने भी उनका साथ दिया.

मीटिंग बनी टीम-बिल्डिंग एक्टिविटी

राहुल गांधी के इस व्यवहार ने औपचारिक ट्रेनिंग को एक हल्के-फुल्के टीम-बिल्डिंग सत्र में बदल दिया. उन्होंने कहा, “डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट्स ने बहुत अच्छा रिस्पॉन्स दिया. हम सबने मज़े में सीखा कि अनुशासन भी मज़ेदार हो सकता है.” कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य पार्टी संगठन में ऊर्जा और एकता लाना है.

राहुल का BJP और ECI पर हमला

पचमढ़ी में राहुल गांधी ने सत्रों के दौरान बीजेपी और चुनाव आयोग पर भी तीखे हमले किए. उन्होंने आरोप लगाया कि “देशभर में वोट चोरी का पैटर्न चल रहा है.” उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में 25 लाख वोट चोरी हुए और कहा, “हमारे पास सबूत हैं, धीरे-धीरे सब सामने लाएंगे.” हालांकि, बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया.

बीजेपी का पलटवार और तंज

बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “बिहार चुनाव चल रहे हैं और राहुल गांधी ‘जंगल सफारी’ पर हैं.” उन्होंने राहुल को “लीडर ऑफ़ पर्य़टन” बताते हुए ताना कसा कि कांग्रेस की प्राथमिकताएं चुनाव नहीं, छुट्टियां हैं. उन्होंने शेर के अंदाज़ में कहा, “धूल चेहरे पे थी, कांग्रेस आईना साफ़ करती रही,” यानी गलती अपनी थी, लेकिन दोष किसी और को दिया गया.