दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, घनश्याम सिंह ने बीजेपी के अशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के अशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराकर सीट बरकरार रखी है.

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Sagar Bhardwaj

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज करते हुए अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी है. कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के अशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से पराजित किया. घनश्याम सिंह को कुल 66,757 वोट मिले, जबकि अशुतोष तिवारी के खाते में 60,741 मत आए. वहीं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे.

मतगणना में बदला मुकाबले का रुख

मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन तीसरे राउंड से कांग्रेस ने बढ़त हासिल करनी शुरू कर दी. तीसरे चरण में घनश्याम सिंह 33 वोटों से आगे निकले. पांचवें राउंड तक उनकी बढ़त 308 वोट हो गई, जबकि छठे राउंड के बाद यह अंतर बढ़कर 1,786 वोट पहुंच गया. इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार ने लगातार अपनी बढ़त मजबूत की और अंततः निर्णायक जीत दर्ज की.

क्यों हुआ था दतिया में उपचुनाव?

दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया गया क्योंकि अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी. इस उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा समेत कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे. 30 जुलाई को हुए मतदान में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे उत्साहजनक माना गया.


2023 के चुनाव की याद फिर ताजा

2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र कुमार भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,700 से अधिक वोटों से हराया था. इस बार भी कांग्रेस ने सीट अपने पास बनाए रखकर यह संकेत दिया कि दतिया में उसका जनाधार कायम है. हालांकि राज्य की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए इस परिणाम से सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

 नतीजों के राजनीतिक मायने भी अहम

दतिया उपचुनाव के परिणाम को केवल एक सीट की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव हाल के छात्र आंदोलनों और बदलते राजनीतिक माहौल के बीच हुआ, इसलिए इसके व्यापक संदेश भी हैं. साथ ही, यह मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पार्टी की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा भी थी. ऐसे में इस नतीजे पर सभी प्रमुख दलों की नजर बनी रहेगी.