भोजशाला को सरस्वती मंदिर मानने के बाद पहली 'महापूजा', 700 साल बाद जली अखंड ज्योति
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में हाई कोर्ट के फैसले के बाद विशेष हवन और महापूजा आयोजित की गई. 700 साल बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित हुई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.
धार: मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर में मंगलवार को विशेष हवन, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए. हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को मां सरस्वती मंदिर मानने के बाद यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे. बताया जा रहा है कि पिछले 23 वर्षों में यह पहला मौका है जब परिसर में 'महासत्याग्रह' और 'महापूजा' का आयोजन किया गया.
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2003 के बाद पहली बार संशोधित नियमों के तहत पूजा-अर्चना कराई जा रही है. विशेष अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करेंगे. आयोजन समिति ने सनातन धर्मावलिंबयों से बड़ी संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद पुराने नियमों को हटाने और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदली व्यवस्था
शनिवार को हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है. फैसले के बाद हिंदुओं को अब पूरे वर्ष पूजा की अनुमति मिल गई है, जबकि पहले केवल मंगलवार को ही पूजा की इजाजत थी.
हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद पुरातत्व विभाग (ASI) का वह बोर्ड भी हट गया है जिस पर लिखा था कि परिसर में केवल मंगलवार को ही हिंदुओं को पूजा की अनुमति है और मुस्लिम शुक्रवार दोपहर को नमाज पढ़ सकेंगे.
700 साल बाद जली अखंड ज्योति
हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज भोज परिसर में करीब 700 वर्षों के बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई. वहीं वर्ष 2003 के बाद पहली बार गर्भग्रह में मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापित की गई. भोजशाला आंदोलन से जुड़े तीन शहीदों की तस्वीरे भी गर्भग्रह में लगाई गई हैं.