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'सेना पीएम मोदी के चरणों में नतमस्तक', MP के मंत्री के बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने दिया सेना को लेकर विवादित बयान, Video वायरल

मध्य प्रदेश की डिप्टी सीएम ने सेना को लेकर विवादित बयान दिया है. डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि पूरे देश की सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चरणों में नतमस्तक है. उन्होंने पहलगाम हमले के बाद भारत की एक्शन के लिए पीएम मोदी की सराहना की.

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Gyanendra Sharma

मध्य प्रदेश की डिप्टी सीएम ने सेना को लेकर विवादित बयान दिया है. डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि पूरे देश की सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चरणों में नतमस्तक है. उन्होंने पहलगाम हमले के बाद भारत के जवाबी एक्शन के लिए पीएम मोदी की सराहना की. 

अपने भाषण के दौरान जगदीश देवड़ा ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को जिस तरह की सजा दी है उसकी जितनी सराहना की जाए उतनी कम है. इस बयान को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है. 

जबलपुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ने भारतीय सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की, जिसने विवाद को जन्म दे दिया. उन्होंने कहा, पूरा देश और देश की सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरणों में नतमस्तक है." यह बयान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के संदर्भ में दिया गया था.

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे सेना का अपमान बताया

जगदीश देवड़ा के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे सेना का अपमान बताया. एक यूजर ने लिखा, यह बयान सेना की स्वतंत्रता और सम्मान को ठेस पहुंचाता है. सेना देश की सेवा करती है, न कि किसी व्यक्ति विशेष की. कुछ अन्य लोगों ने इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा मानते हुए कहा कि डिप्टी सीएम ने पीएम मोदी की प्रशंसा करने के चक्कर में सेना की गरिमा को अनजाने में नुकसान पहुंचाया.  विपक्षी दलों ने भी इस बयान की आलोचना की है.

जगदीश देवड़ा मध्य प्रदेश की मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं और अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से आते हैं. वह पूर्व में शिवराज सिंह चौहान सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं. 2023 में बीजेपी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी, जिसके पीछे पार्टी की लोकसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति थी.