कर्नाटक में 'ढोंगी बाबा' की करतूत का वीडियो वायरल, 7 साल की बच्ची से की शर्मनाक हरकत; अब पुलिस ने कसा शिकंजा

कर्नाटक के यादगीर जिले में एक स्वयंभू धर्मगुरु मल्लिकार्जुन मुत्तवा के खिलाफ सात साल की मासूम बच्ची के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. बच्ची के असहज होने और वीडियो वायरल होने के बाद बाल अधिकार आयोग की सिफारिश पर यह कार्रवाई हुई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: आध्यात्मिक आस्था की आड़ में मासूमों के साथ खिलवाड़ करने वाले एक और 'स्वयंभू बाबा' का असली चेहरा सामने आया है. कर्नाटक के यादगीर जिले के शाहपुर स्थित एक मठ के धर्मगुरु मल्लिकार्जुन मुत्तवा के खिलाफ पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. यह कार्रवाई एक सोशल मीडिया वीडियो के वायरल होने के बाद की गई है, जिसमें आरोपी बाबा एक सात वर्षीय बच्ची के साथ बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित व्यवहार करता नजर आ रहा है.

वायरल वीडियो में आरोपी मल्लिकार्जुन मुत्तवा बच्ची को अपनी गोद में बैठाकर उसे चूमता हुआ दिखाई दे रहा है. इस दौरान बच्ची के माता-पिता भी वहीं मौजूद थे. हैरान करने वाली बात यह है कि यह वीडियो बच्ची के माता-पिता ने ही बनाया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया था. जैसे ही यह फुटेज इंटरनेट पर फैला, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और नेटिजन्स ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी.

बाल अधिकार आयोग का सख्त रुख 

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया और स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट तलब की. आयोग के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण अधिकारियों ने शाहपुर स्थित आश्रम का दौरा किया. वहां मौजूद बच्ची और महाराष्ट्र के सोलापुर से आए उसके माता-पिता के बयान दर्ज किए गए.

माता-पिता की दलील और प्रशासन की कार्रवाई 

जांच के दौरान एक अजीबोगरीब स्थिति तब उत्पन्न हुई जब माता-पिता ने आरोपी का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें बाबा के व्यवहार में कुछ भी गलत नहीं लगा. हालांकि, बाल कल्याण समिति (CWC) ने वीडियो का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद पाया कि बाबा के स्पर्श के दौरान मासूम बच्ची स्पष्ट रूप से असहज और डरी हुई दिख रही थी.

यादगीर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्पष्ट किया कि यद्यपि माता-पिता ने इसे सामान्य माना, लेकिन कानूनन सात साल के बच्चे की सहमति का कोई औचित्य नहीं होता है और वीडियो के साक्ष्य पर्याप्त हैं. काउंसलिंग के बाद, बाल कल्याण समिति की सिफारिश पर पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है. वर्तमान में पुलिस इस मामले की गहन तफ्तीश कर रही है और आरोपी को नोटिस जारी कर दिया गया है.