मेट्रो में महिला को अजनबी लड़की ने तोहफे में दिया 'सोने का कंगन', सोशल मीडिया में शेयर की आपबीती, मामला जानकर आप भी होंगे हैरान
मेट्रो यात्राएं आमतौर पर भीड़भाड़ वाले डिब्बों, खोए हुए फोन या यात्रियों के अप्रिय व्यवहार के लिए जानी जाती हैं. लेकिन बेंगलुरु मेट्रो की एक छोटी और प्यारी घटना ने ऑनलाइन कई लोगों को भावुक कर दिया है. एक महिला ने एक साधारण अनुभव शेयर किया जिससे पता चलता है कि रोजमर्रा की यात्रा के दौरान भी दयालुता देखने को मिल सकती है.
बेंगलुरु: बेंगलुरु मेट्रो में एक सामान्य सफर ने अचानक इतनी खूबसूरत याद बन गई कि सोशल मीडिया पर हर कोई इसे दिल छू लेने वाली कहानी बता रहा है. एक महिला रितु जून ने अपनी इस अनोखी मुलाकात को शेयर किया, जिसने लोगों का दिल जीत लिया. रितु बेंगलुरु मेट्रो में सफर कर रही थीं. उनके बगल में एक लड़की बैठी थी, जिसके हाथ में सोने जैसा चमकता हुआ खूबसूरत कंगन था. रितु को वो डिजाइन इतना पसंद आया कि उन्होंने विनम्रता से पूछा- 'क्या मैं इसकी फोटो ले सकती हूं? मैं अपने सुनार को दिखाकर वैसा ही बनवाना चाहती हूं.'फिर जो हुआ, वो किसी ने सोचा नहीं था.
मेट्रो में महिला को अजनबी लड़की ने तोहफे में दिया 'सोने का कंगन'
लड़की ने न सिर्फ फोटो की इजाजत दी, बल्कि बंगला अपनी कलाई से उतारकर रितु को थमा दिया. उसने कहा- 'आप इसे ले जाइए, सुनार को डिजाइन बेहतर समझ आएगा.' रितु हैरान रह गईं. एकदम अजनबी पर इतना भरोसा. वो शॉक्ड थीं कि किसी ने बिना झिझक के अपना सामान किसी अनजान को सौंप दिया. फिर लड़की ने मुस्कुराते हुए बताया कि ये बंगला असली सोने का नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल (नकली) है. लेकिन इस बात से रितु की भावनाएं और गहरी हो गईं. क्योंकि असली या नकली, भरोसे और दयालुता की कीमत तो वही रहती है.
रितु ने कहा- 'मैंने सिर्फ फोटो मांगी थी, लेकिन उन्होंने मुझे वो कंगन पहना दिया. ये छोटा सा इशारा इंसानियत की कितनी बड़ी मिसाल है!' इस घटना को रितु ने X पर शेयर किया, जिसके बाद ये पोस्ट वायरल हो गई. लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं, "मेट्रो में ऐसी अच्छी कहानियां कम ही सुनने को मिलती हैं", "इंसानियत अभी बाकी है", "ये भरोसा देखकर दिल खुश हो गया". कई ने कहा कि आज के दौर में जहां लोग फोन भी छिपाकर रखते हैं, वहां एक अजनबी ने इतना बड़ा भरोसा दिखाया.
रितु ने फैसला किया कि वो ये कंगन हमेशा रखेंगी, ताकि ये छोटी सी मुलाकात और उसकी गर्मजोशी हमेशा याद रहे. ये कहानी बताती है कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी कहीं न कहीं दया, विश्वास और अच्छाई छिपी रहती है. मेट्रो जैसे भीड़भाड़ वाले सफर में भी इंसानियत की ऐसी छोटी-छोटी कहानियां दिल को सुकून देती हैं.