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'करोड़ों रुपये और ब्लैंक चेक का ऑफर', डीके शिवकुमार ने BJP पर लगाए कांग्रेस विधायकों को खरीदने की कोशिश करने के आरोप

बेंगलुरु के पास एक रिसॉर्ट में ओडिशा कांग्रेस विधायकों को रिश्वत देने की कोशिश में दो लोग गिरफ्तार हुए हैं. कांग्रेस ने भाजपा पर 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप लगाते हुए ₹5 करोड़ के प्रलोभन का दावा किया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ठहरे ओडिशा के कांग्रेस विधायकों को तोड़ने की कोशिश का मामला सामने आया है. कथित तौर पर विधायकों को करोड़ों रुपये और ब्लैंक चेक का ऑफर दिया गया. इस घटना ने 16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले राजनीति में भूचाल ला दिया है.

बेंगलुरु के पास स्थित रिसॉर्ट में रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस ने दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया. इन पर आरोप है कि वे राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग सुनिश्चित करने के लिए ओडिशा कांग्रेस के विधायकों को प्रलोभन दे रहे थे. कांग्रेस का दावा है कि ये लोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे. पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए पकड़े गए आरोपियों से अब कड़ी पूछताछ कर रही है.

'ऑपरेशन लोटस' का साया 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने इस पूरे प्रकरण को 'ऑपरेशन लोटस' का हिस्सा करार दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी विपक्षी विधायकों को खरीदने के लिए धनबल का दुरुपयोग कर रही है. शिवकुमार के अनुसार विधायकों को पाला बदलने के लिए 5 करोड़ प्रति वोट की पेशकश की गई थी. उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए भाजपा के चुनावी हथकंडों की निंदा की और नैतिकता पर सवाल उठाए.

विधायकों की सुरक्षा के इंतजाम 

ओडिशा कांग्रेस के आठ विधायक और कुछ पदाधिकारी वर्तमान में बेंगलुरु के इस रिसॉर्ट में डेरा डाले हुए हैं. पार्टी ने यह कदम विधायकों को किसी भी तरह के बाहरी प्रलोभन या दबाव से बचाने के लिए उठाया था. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के कारण इस राज्य को विधायकों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना गया था, लेकिन रिसॉर्ट के भीतर ही घुसपैठ की कोशिश ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.

ब्लैंक चेक का प्रलोभन 

कांग्रेस सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार प्रलोभन देने की कोशिशें काफी अनैतिक स्तर तक गिर गई थीं. एक विधायक को कथित तौर पर अपनी मर्जी की रकम भरने के लिए 'ब्लैंक चेक' तक ऑफर किया गया था. डीके शिवकुमार ने बताया कि एक ईमानदार विधायक ने खुद सामने आकर इस सौदेबाजी की जानकारी दी और हॉर्स ट्रेडिंग का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया. यह दर्शाता है कि राज्यसभा सीटों के लिए संघर्ष तीखा हो गया है.

आगामी चुनाव पर प्रभाव 

16 मार्च को ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना है. विपक्षी एकता को बनाए रखना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है. इस विवाद ने न केवल ओडिशा बल्कि कर्नाटक की राजनीति को भी गरमा दिया है. भाजपा ने फिलहाल इन आरोपों पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाने की तैयारी में है. अब सबकी निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं.