NALSAR विवाद की आंच NLSIU तक पहुंची, छात्रों ने CJI और BCI चेयरमैन के आमंत्रण का किया विरोध; दीक्षांत समारोह को लेकर बढ़ा विवाद
NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने NALSAR विवाद के बाद CJI सूर्यकांत और BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया है.
बेंगलुरु: बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी यानी NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने आगामी दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को आमंत्रित किए जाने का विरोध किया है. NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों ने यह कदम हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के समर्थन में उठाया है.
15 अगस्त को जारी संयुक्त बयान में छात्रों और पूर्व छात्रों ने 13 अगस्त को BCI की ओर से जारी उस विवादित आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के कानून स्नातकों के राज्य बार काउंसिल में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था. विवाद बढ़ने के बाद BCI ने इस आदेश को वापस ले लिया था.
बयान में क्या कहा गया?
NLSIU के संयुक्त बयान पर 2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 वर्तमान छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं. बयान में कहा गया कि NALSAR के छात्रों ने सच बोलने के लिए साहस दिखाया है और NLSIU के छात्र उनके साथ बिना किसी शर्त के एकजुटता व्यक्त करते हैं.
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छात्रों का क्या है कहना?
छात्रों और पूर्व छात्रों ने कहा कि BCI ने भले ही NALSAR के खिलाफ सभी कार्यवाही बंद कर दी हो, लेकिन इस तरह की कार्यवाही किसी वैधानिक संस्था की ओर से किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जाना अपने आप में गंभीर विषय है. उनके अनुसार, इस घटना ने देशभर में स्वतंत्र अभिव्यक्ति को लेकर डर का माहौल पैदा किया है.
छात्रों ने क्यों किया विरोध?
संयुक्त बयान में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर भी असहमति जताई गई. छात्रों ने कहा कि जब तक BCI चेयरमैन अपने आचरण और रुख की जिम्मेदारी नहीं लेते, तब तक उनके NLSIU के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर उन्हें आपत्ति है.
छात्रों ने CJI सूर्यकांत के मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने को लेकर भी असहमति जाहिर की है. उन्होंने NALSAR के छात्रों की उस मांग के साथ एकजुटता जताई है, जिसमें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन पर पुनर्विचार करने की बात कही गई है.
BCI के आदेश से शुरू हुआ था विवाद
BCI के आदेश में NALSAR के 2026 में स्नातक होने वाले छात्रों के सभी राज्य बार काउंसिल में नामांकन पर रोक लगाने की बात कही गई थी. आदेश सामने आने के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया. बाद में BCI ने इसे वापस ले लिया और मनन कुमार मिश्रा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का स्वागत किया जाता है.
इस पूरे मामले पर CJI सूर्यकांत ने भी BCI के आदेश पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि BCI को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था. उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को कानून के दायरे में रहकर विरोध करने का पूरा अधिकार है.